Bharti Hexacom Limited ने 31 दिसंबर 2025 को समाप्त तीसरी तिमाही (Q3 FY26) के अपने वित्तीय नतीजे जारी कर दिए हैं। कंपनी का मुनाफा 81.56% बढ़कर ₹4,737 मिलियन हो गया, जबकि पिछले साल की इसी तिमाही में यह ₹2,609 मिलियन था। इस शानदार जम्प का श्रेय ₹487 मिलियन के उस खास टैक्स क्रेडिट को जाता है, जो दिल्ली इनकम टैक्स ट्रिब्यूनल के एक अनुकूल फैसले से मिला। इस फैसले के तहत स्पेक्ट्रम यूसेज चार्जेस (Spectrum Usage Charges) को रेवेन्यू एक्सपेंडिचर (Revenue Expenditure) माना गया, जिसने करंट टैक्स एक्सपेंस (Current Tax Expense) को काफी कम कर दिया। साथ ही, कंपनी का प्रॉफिट बिफोर टैक्स (PBT) भी 49.99% बढ़कर ₹5,690 मिलियन पर पहुँच गया, जो पिछले साल ₹3,793 मिलियन था। नतीजतन, बेसिक और डाइल्यूटेड अर्निंग्स पर शेयर (EPS) भी ₹5.22 से बढ़कर ₹9.47 हो गया।
अगर रेवेन्यू की बात करें, तो Q3 FY26 में यह 4.87% बढ़कर ₹23,598 मिलियन रहा, जो पिछले साल की समान अवधि में ₹22,507 मिलियन था। वहीं, नौ महीनों (Nine Months FY26) के दौरान, रेवेन्यू में 10.88% की वृद्धि देखी गई और यह ₹69,401 मिलियन पर पहुँच गया, जो पिछले साल ₹62,589 मिलियन था। इस अवधि में कंपनी का मुनाफा 25.50% बढ़कर ₹12,865 मिलियन रहा, जो पिछले साल ₹10,252 मिलियन था। नौ महीनों के लिए PBT में 28.12% की बढ़त के साथ यह ₹16,599 मिलियन पर पहुँचा, और नौ महीनों के लिए EPS ₹20.50 से बढ़कर ₹25.73 पर आ गया।
मुनाफे में बढ़ोतरी में कंपनी के घटते फाइनेंस कॉस्ट (Finance Cost) का भी बड़ा हाथ रहा। Q3 FY26 में यह 18.43% घटकर ₹1,470 मिलियन रहा, और नौ महीनों के लिए इसमें 30.38% की कमी आई, जो ₹4,520 मिलियन पर आ गया। हालांकि, डेप्रिसिएशन और एमोर्टाइजेशन (Depreciation and Amortisation) खर्चों में Q3 FY26 में 6.64% की मामूली बढ़ोतरी हुई। इसके अलावा, नए लेबर कोड्स (Labour Codes) से जुड़े प्रोविज़ंस (Provisions) के कारण Q3 FY26 में ₹91 मिलियन का एक एक्सेप्शनल चार्ज (Exceptional Charge) भी लगा। पिछले साल की इसी तिमाही में भी ऐसा ही ₹91 मिलियन का आइटम दर्ज किया गया था।
बैलेंस शीट (Balance Sheet) की बात करें तो, 31 दिसंबर 2025 तक कुल एसेट्स (Total Assets) में मामूली YoY बढ़ोतरी के साथ यह ₹192,031 मिलियन रहे। वहीं, कुल लायबिलिटीज (Total Liabilities) में खासी कमी आई और यह ₹136,905 मिलियन से घटकर ₹124,848 मिलियन रह गई, जिसका मुख्य कारण बॉरोइंग्स (Borrowings) में कमी है। सेगमेंट परफॉर्मेंस (Segmental Performance) की बात करें तो Q3 FY26 में मोबाइल सर्विसेज (Mobile Services) से ₹22,718 मिलियन का रेवेन्यू आया, जबकि होम्स, ऑफिस और अन्य सर्विसेज (Homes, Office and Other Services) से ₹972 मिलियन का रेवेन्यू दर्ज किया गया।
हालांकि, कंपनी के मैनेजमेंट (Management) की ओर से भविष्य को लेकर कोई गाइडेंस (Guidance) या आउटलुक (Outlook) जारी नहीं किया गया है। इस वजह से यह समझना मुश्किल है कि क्या इस मुनाफे की ग्रोथ आगे भी बनी रहेगी, खासकर जब इसमें बड़े टैक्स क्रेडिट का बड़ा योगदान है। इससे निवेशकों के लिए भविष्य की अनिश्चितता बढ़ जाती है।
