नेटवर्क स्लाइसिंग की जांच
Bharti Airtel की 'प्रायोरिटी पोस्टपेड' सर्विस को लेकर भारत के डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकम्युनिकेशन (DoT) और टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (TRAI) ने तुरंत संज्ञान लिया है। यह सर्विस 5G स्टैंडअलोन नेटवर्क स्लाइसिंग का इस्तेमाल करती है, जिससे पोस्टपेड ग्राहकों के लिए डेडिकेटेड वर्चुअल चैनल बनाए जाते हैं। इसका मकसद पीक आवर्स (Peak Hours) में भी लगातार कनेक्टिविटी सुनिश्चित करना है। हालांकि, संचार पर संसदीय स्थायी समिति इस बात का मूल्यांकन कर रही है कि क्या ट्रैफिक मैनेजमेंट का यह तरीका 'पसंदीदा ट्रीटमेंट' (Preferential Treatment) के तहत आता है, जिसे नियमों में मना किया गया है।
कंपनी की स्थिति और बचाव की रणनीति
रेगुलेटरी सवालों के बावजूद, Airtel बाजार में मजबूत प्रदर्शन कर रही है और हाल ही में इसने सब्सक्राइबर ग्रोथ में अपने प्रतिद्वंद्वी Reliance Jio को पीछे छोड़ा है। कंपनी का मार्केट कैपिटलाइजेशन ₹11 ट्रिलियन से अधिक है और यह लगभग 34x के ट्रेलिंग P/E रेश्यो (Trailing P/E Ratio) पर ट्रेड कर रही है। Airtel अपने बचाव में कह रही है कि उनके नेटवर्क की कैपेसिटी यूटिलाइजेशन (Capacity Utilization) फिलहाल 38% है। उनका तर्क है कि पोस्टपेड यूजर्स के 4% ट्रैफिक को डेडिकेटेड नेटवर्क स्लाइस देने के बाद भी बाकी 92% यूजर्स के लिए पर्याप्त नेटवर्क कैपेसिटी उपलब्ध रहेगी। इससे प्रीपेड यूजर्स सहित अन्य ग्राहकों के कनेक्शन की क्वालिटी पर कोई खतरा नहीं है।
रेगुलेटरी जोखिम और मुकाबला
Airtel के लिए एक बड़ी चुनौती यह है कि ट्रैफिक मैनेजमेंट प्रैक्टिसेज (TMPs) के लिए अभी तक कोई पुख्ता और कोडिफाइड रेगुलेशन (Codified Regulation) नहीं हैं। TRAI ने 2020 में कुछ सुझाव दिए थे, लेकिन वे अभी कानून नहीं बने हैं। इस वजह से टेलीकॉम ऑपरेटर्स रेगुलेटरी अनिश्चितता (Regulatory Uncertainty) का सामना कर रहे हैं। प्रतिद्वंद्वी कंपनियाँ और इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स समान एक्सेस (Equal Access) के सिद्धांतों के सख्त पालन की वकालत कर रहे हैं, ताकि बड़ी कंपनियाँ ग्राहकों को लुभाने या प्रीमियम सर्विसेज का फायदा उठाने में कोई अनुचित लाभ न ले सकें। अगर संसदीय समिति यह पाती है कि Airtel की स्लाइसिंग 'फास्ट लेन' (Fast Lane) बना रही है, तो कंपनी को यह सर्विस बंद करनी पड़ सकती है या नियमों का पालन करने के लिए बड़े बदलाव करने पड़ सकते हैं। इससे 5G की प्रीमियम सुविधाओं से कमाई करने की उसकी क्षमता प्रभावित हो सकती है।
Airtel की 5G पेशकश का भविष्य
Bharti Airtel का कहना है कि उनकी सर्विस कंटेंट-न्यूट्रल (Content-Neutral) है और मौजूदा लाइसेंसिंग नॉर्म्स (Licensing Norms) के अनुरूप है। कंपनी का मानना है कि यह भारत के टेलीकम्युनिकेशन के भविष्य पर एक बड़ी चर्चा है। उनका सुझाव है कि बहुत सख्त नीतियां 6G की ओर देश की प्रगति को धीमा कर सकती हैं। निवेशक इस बात पर नजर रखे हुए हैं कि क्या समिति एक विस्तृत टेक्निकल ऑडिट (Technical Audit) का आदेश देगी या मौजूदा स्लाइसिंग मॉडल को जारी रखने की अनुमति देगी, जो भविष्य की प्रीमियम डिजिटल सेवाओं के लिए एक मिसाल कायम कर सकता है।
