DoT का कड़ा रुख: एयरटेल को नहीं मिलेगी सीधी छूट
दूरसंचार विभाग (DoT) ने साफ कर दिया है कि भारती एयरटेल को एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू (AGR) ड्यूज के भुगतान में किसी भी तरह की छूट के लिए सुप्रीम कोर्ट से एक अलग आदेश लाना होगा। कंपनी ने इस संबंध में वोडाफोन आइडिया को मिली कुछ रियायतों का हवाला देकर राहत की गुहार लगाई थी। लेकिन, DoT का कहना है कि एयरटेल के मामले की स्थिति वोडाफोन आइडिया से अलग है, जिसके लिए विशेष न्यायिक फैसले ने कर्ज पुनर्गठन (debt restructuring) की राह खोली थी।
वित्तीय दबाव और बाजार की प्रतिक्रिया
इस फैसले से भारती एयरटेल पर वित्तीय दबाव और बढ़ गया है, क्योंकि कंपनी पर लगभग ₹42,000 करोड़ का AGR ड्यूज बकाया है। DoT के इस रुख का सीधा मतलब है कि एयरटेल, वोडाफोन आइडिया की तरह वित्तीय राहत पैकेज का सीधे तौर पर लाभ नहीं उठा सकेगा। भले ही सरकार ने 5 साल का मोरेटोरियम (moratorium) और 10 साल की पुनर्भुगतान अवधि (repayment schedule) की मंजूरी दे दी हो, एयरटेल को इसके लिए एक नया सुप्रीम कोर्ट आदेश हासिल करना ही होगा। इस अनिश्चितता के चलते कंपनी की उधार लेने की लागत बढ़ सकती है और 5G जैसी महत्वपूर्ण तकनीकों में निवेश की योजनाओं पर भी असर पड़ सकता है।
बाजार में इस खबर का असर तुरंत देखने को मिला। शुक्रवार दोपहर को भारती एयरटेल के शेयर 0.5% की गिरावट के साथ ₹1,826.5 पर कारोबार कर रहे थे। इस गिरावट के साथ ही, इस साल अब तक एयरटेल के शेयर 13.4% तक गिर चुके हैं। कंपनी का कुल मार्केट कैप लगभग ₹579,570 करोड़ है, और इसका प्राइस-टू-अर्निंग्स (P/E) रेश्यो फिलहाल करीब 38.4x चल रहा है।
प्रतिस्पर्धा और आगे की राह
विश्लेषकों का कहना है कि रिलायंस जियो जैसी निजी कंपनियां अलग वित्तीय ढांचे पर काम करती हैं और उन्हें AGR विवादों का सीधा सामना नहीं करना पड़ता। वोडाफोन आइडिया भले ही बकाये से जूझ रहा हो, लेकिन उसे पहले ही एक न्यायिक समर्थन मिल चुका है, जिसकी तलाश अब भारती एयरटेल को करनी होगी। भविष्य में, भारती एयरटेल को अपने AGR ड्यूज के लिए इसी तरह की वित्तीय राहत पाने के लिए एक अलग कानूनी रास्ता अपनाना होगा। कंपनी प्रबंधन का इस जटिल कानूनी प्रक्रिया को सफलतापूर्वक संभालना, भविष्य के विकास और निवेश के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होगा।