S&P ग्लोबल रेटिंग्स ने भारती एयरटेल की लॉन्ग-टर्म क्रेडिट रेटिंग को 'BBB' से बढ़ाकर 'BBB+' कर दिया है। एजेंसी ने भारत और अफ्रीका में मजबूत कमाई की ग्रोथ और कर्ज घटाने में हुई स्पष्ट प्रगति को इसका मुख्य कारण बताया है।
S&P का बड़ा कदम
S&P ग्लोबल रेटिंग्स ने भारती एयरटेल के लिए एक बड़ी खुशखबरी सुनाई है। एजेंसी ने कंपनी की लॉन्ग-टर्म क्रेडिट रेटिंग को पहले के 'BBB' स्तर से ऊपर उठाकर 'BBB+' कर दिया है। यह रेटिंग में सुधार कंपनी के वित्तीय स्वास्थ्य में आ रही मजबूती और शानदार नतीजों को दर्शाता है। रेटिंग एजेंसी का मानना है कि भारत और अफ्रीका के टेलीकॉम बाजारों में उम्मीद के मुताबिक ग्रोथ कंपनी को अपना कर्ज कम करने के लक्ष्य को हासिल करने में मदद करेगी।
कमाई और ग्रोथ की उम्मीदें
यह रेटिंग अपग्रेड कंपनी के भविष्य के प्रदर्शन को लेकर सकारात्मक अनुमानों पर आधारित है। S&P का अनुमान है कि अगले एक साल में भारत में भारती एयरटेल के ग्राहकों की संख्या 3% से 4% तक बढ़ सकती है। इसके अलावा, प्रति यूजर औसत कमाई (ARPU), जो यह बताता है कि कंपनी हर ग्राहक से कितना पैसा कमा रही है, उसमें 5% से 7% की बढ़ोतरी की उम्मीद है। यह बढ़ोतरी ग्राहकों के महंगे डेटा प्लान्स को चुनने और नए ग्राहक जुड़ने से संभव होगी।
अफ्रीका का बढ़ता महत्व
इस सकारात्मक तस्वीर का एक बड़ा हिस्सा भारती एयरटेल के अफ्रीकी ऑपरेशन्स से आ रहा है। S&P का अनुमान है कि अगले 12 से 24 महीनों में अफ्रीका का बिजनेस भारत के ऑपरेशन्स से ज्यादा तेजी से बढ़ सकता है। एजेंसी को उम्मीद है कि अफ्रीका में ग्राहकों की संख्या सालाना 9% से 11% तक बढ़ेगी। इतना ही नहीं, कंपनी के कुल ऑपरेटिंग प्रॉफिट (EBITDA) में अफ्रीकी सेगमेंट का योगदान बढ़कर 25% से 27% तक पहुंच सकता है, जो पहले 20% के आसपास रहने का अनुमान था।
कर्ज घटाना क्यों है ज़रूरी?
शेयरधारकों और निवेशकों के लिए सबसे अहम बात कंपनी का कर्ज घटाने पर ध्यान केंद्रित करना है। S&P का मानना है कि अगले दो सालों में कंपनी का कंसॉलिडेटेड ऑपरेटिंग प्रॉफिट सालाना 8% से 10% तक बढ़ता रहेगा। इस लगातार बनी रहने वाली कमाई से कंपनी की बैलेंस शीट में सुधार होने की उम्मीद है। एजेंसी 'फंड्स-फ्रॉम-ऑपरेशन्स-टू-डेट' (Funds-from-operations-to-debt) जैसे मेट्रिक्स का इस्तेमाल करती है, और यह अनुमान लगाती है कि आने वाले वर्षों में यह अनुपात 50% से ऊपर चला जाएगा। यह अनुपात मूल रूप से यह मापता है कि कंपनी की कैश फ्लो कितनी आसानी से उसके कर्ज के बोझ को कवर कर सकती है।
क्या रेटिंग पर पड़ सकता है दबाव?
हालांकि, आउटलुक स्थिर है, रेटिंग एजेंसी ने कुछ ऐसे कारक भी बताए हैं जिनसे उनके नज़रिए में बदलाव आ सकता है। अगर कंपनी का कर्ज उम्मीद के मुताबिक कम नहीं होता है, या कैश फ्लो से कर्ज चुकाने की उसकी क्षमता 45% से नीचे गिर जाती है, तो रेटिंग पर दबाव आ सकता है। यह जोखिम तब पैदा हो सकता है जब कंपनी को उम्मीद से कम कमाई हो, वह कर्ज लेकर बड़े प्रोजेक्ट्स में निवेश करे, या कर्ज चुकाने की बजाय शेयरधारकों को भारी डिविडेंड (Dividend) दे।
आगे क्या देखना होगा?
निवेशक संभवतः टेलीकॉम सेक्टर में प्रतिस्पर्धा के बीच कंपनी की प्रॉफिट मार्जिन बनाए रखने की क्षमता पर नज़र रखेंगे। मुख्य रूप से कंपनी के वास्तविक कर्ज के स्तर और अनुमानित कैश फ्लो में सुधार पर ध्यान दिया जाएगा। भविष्य की अर्निंग रिपोर्ट्स यह पुष्टि करने के लिए महत्वपूर्ण होंगी कि क्या अफ्रीकी बाजार में ARPU और ग्राहकों की संख्या में बढ़ोतरी इन सकारात्मक अनुमानों के अनुरूप जारी है।
