सरकार ने BharatNet प्रोजेक्ट में बड़ा बदलाव करते हुए प्राइवेट इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर्स (ISPs) को एंट्री दे दी है। अब ISPs को **95%** सब्सक्रिप्शन रेवेन्यू मिलेगा और प्रति कनेक्शन **₹12,900** तक की सब्सिडी दी जाएगी, ताकि ग्रामीण इलाकों में इंटरनेट की पहुंच बढ़ सके।
प्राइवेट प्लेयर्स के लिए नई रणनीति
भारत सरकार अब ग्रामीण कनेक्टिविटी को रफ्तार देने के लिए पूरी तरह से प्राइवेट सेक्टर पर दांव लगा रही है। अब तक का आंकड़ा देखें तो 1.5 करोड़ कनेक्शन के लक्ष्य के मुकाबले केवल 16.4 लाख घर ही जुड़ पाए हैं। इसी सुस्त रफ्तार को ठीक करने के लिए अब प्राइवेट ISPs सीधे गांव स्तर पर सर्विस संभालेंगे।
रेवेन्यू और सब्सिडी का गणित
नई गाइडलाइंस के तहत प्राइवेट कंपनियों के लिए कमाई के रास्ते खोल दिए गए हैं। अब ये कंपनियां BSNL की सब-कॉन्ट्रैक्टर नहीं रहेंगी, बल्कि कुल सब्सक्रिप्शन रेवेन्यू का 95% हिस्सा अपने पास रख सकेंगी। इसके अलावा, सरकार ₹8,900 से लेकर ₹12,900 तक की सीधी सब्सिडी देगी। वहीं, BSNL अब केवल एक प्रोजेक्ट मैनेजमेंट एजेंसी के रूप में काम करेगी।
रिस्क और चुनौतियां
निवेशकों को ध्यान रखना होगा कि यह मॉडल पूरी तरह रिस्क-फ्री नहीं है। सरकार ने सख्त नियम बनाए हैं: कंपनियों को सब्सिडी के बराबर बैंक गारंटी या श्योरिटी बॉन्ड 30 महीने के लिए जमा करना होगा।
CAG की पिछली रिपोर्ट में यह सामने आया था कि नेटवर्क में खराबी आने पर उसे ठीक होने में औसतन 17 दिन का समय लगता है। अगर प्राइवेट कंपनियां इस मेंटेनेंस चैलेंज को हल नहीं कर पाईं, तो उन्हें सब्सिडी गंवाने और पेनल्टी का सामना करना पड़ सकता है। अब मार्केट की नजर इस पर है कि क्या बड़ी टेलीकॉम कंपनियां इसमें हिस्सा लेती हैं या छोटे रीजनल प्लेयर बाजी मारते हैं।
