नेटवर्क विस्तार से मुनाफे को बूस्ट
BSNL अपनी 4G नेटवर्क पर पहले ही ₹20,000 करोड़ खर्च कर चुकी है, जिसे स्वदेशी टेक्नोलॉजी से बनाया गया है। पिछले फाइनेंशियल ईयर 2023-24 में BSNL का ऑपरेटिंग प्रॉफिट ₹2,395 करोड़ था, जो इस बार लगभग दोगुना होकर ₹5,100 करोड़ हो गया है। कंपनी के ग्राहक भी बढ़े हैं, जो जून 2024 में 8.55 करोड़ से बढ़कर अब 9.27 करोड़ हो गए हैं। BSNL को उम्मीद है कि 5G पर जाना ज़्यादातर सॉफ्टवेयर अपडेट से हो जाएगा, क्योंकि उसका 4G इंफ्रास्ट्रक्चर पहले से तैयार है।
कड़ी प्रतिस्पर्धा और नेटवर्क की खामियां
भारतीय टेलीकॉम मार्केट में Reliance Jio और Bharti Airtel का दबदबा है, जिनके पास वायरलेस ग्राहकों का 75% से ज़्यादा शेयर है। BSNL का मार्केट शेयर सिर्फ 7.9% है। कमाई के मामले में भी भारी अंतर है। Bharti Airtel का ARPU (एवरेज रेवेन्यू पर यूजर) ₹256 है, जबकि Jio का ₹211.4 है। BSNL का ARPU ₹40 से ₹175 के बीच है। प्रतिद्वंद्वी कंपनियां पहले से ही 5G सब्सक्राइबर बेस बना रही हैं, जबकि BSNL ने अभी तक कोई 5G सेवा लॉन्च नहीं की है।
नए 4G टावरों के सिग्नल अक्सर तय पावर लेवल से कम पाए गए हैं, जिससे कवरेज की समस्या, कॉल ड्रॉप और धीमी डेटा स्पीड की शिकायतें आम हैं। रेगुलेटर TRAI के टेस्ट में भी BSNL, Jio और Airtel से क्वालिटी में पिछड़ता दिख रहा है।
कमजोरियां और वित्तीय जांच
रेगुलेटर TRAI के अनुसार, हजारों टावरों का पावर लेवल 46 dBm के लक्ष्य के बजाय 35 dBm से नीचे है, जिससे कॉल ड्रॉप और इंटरनेट स्पीड पर सीधा असर पड़ रहा है। ऑपरेटिंग प्रॉफिट बढ़ने के बावजूद, कंपनी को लगातार नेट लॉस हो रहा है। Q2 FY26 में ₹1,357 करोड़ का घाटा दर्ज किया गया। सरकारी ऑडिटर (CAG) की रिपोर्ट में सामने आया कि BSNL ने 10 साल से ज़्यादा समय तक Reliance Jio से साझा इंफ्रास्ट्रक्चर का बिल नहीं वसूला, जिससे सरकार को ₹1,757 करोड़ का अनुमानित नुकसान हुआ। Vodafone Idea के साथ इंफ्रास्ट्रक्चर शेयरिंग पर चर्चा भी कंपनी पर वित्तीय दबाव को दिखाती है।
आगे का रास्ता
BSNL का भविष्य सरकारी समर्थन और परिचालन बाधाओं को दूर करने की उसकी क्षमता पर निर्भर करेगा। महत्वाकांक्षी टावर विस्तार और स्वदेशी टेक्नोलॉजी विकास राष्ट्रीय प्राथमिकताएं हैं, लेकिन इस गलाकाट बाजार में उनकी सफलता अनिश्चित बनी हुई है। लंबे समय तक बने रहने के लिए BSNL को लगातार उच्च-गुणवत्ता वाली नेटवर्क सेवाएं देनी होंगी, 5G रोलआउट में तेज़ी लानी होगी और प्रतिस्पर्धियों के साथ प्रति यूजर कमाई का अंतर कम करना होगा।