क्या है Airtel की नई 'प्रायोरिटी पोस्टपेड' सर्विस?
भारती एयरटेल ने हाल ही में अपनी 'प्रायोरिटी पोस्टपेड' सर्विस लॉन्च की है, जो 5G नेटवर्क स्लाइसिंग टेक्नोलॉजी पर आधारित है। इस सर्विस के ज़रिए कंपनी पोस्टपेड ग्राहकों को बेहतर और ज़्यादा स्पीड वाली 5G इंटरनेट सर्विस देने का वादा कर रही है। यह सेवा ₹449 से शुरू होती है और इसमें प्रायोरिटी 5G एक्सेस, तेज़ स्पीड और डिजिटल सर्विस का बंडल शामिल है। इस कदम से कंपनी का मकसद प्रीपेड से पोस्टपेड प्लान में ग्राहकों को खींचकर अपनी आय बढ़ाना है।
नेट न्यूट्रैलिटी पर क्यों उठ रहे सवाल?
यह नई सर्विस भारतीय रेगुलेटर्स, जैसे कि दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) और भारत सरकार के लिए चिंता का विषय बन गई है। सवाल यह उठ रहा है कि क्या पोस्टपेड ग्राहकों को बेहतर स्पीड देना, प्री-पेड ग्राहकों की सर्विस क्वालिटी को खराब कर सकता है? इससे डिजिटल डिवाइड (digital divide) पैदा होने की आशंका है। भारत में नेट न्यूट्रैलिटी के नियम, जो 2016 से लागू हैं, मुख्य रूप से कंटेंट के आधार पर भेदभाव को रोकते हैं। लेकिन एयरटेल का मामला ग्राहक वर्ग के आधार पर सेवा की गुणवत्ता में अंतर का है, जिस पर रेगुलेटर्स की स्पष्ट गाइडेंस का अभाव है।
रेगुलेटर्स का रुख और इंडस्ट्री की मांग
भारत में नेटवर्क स्लाइसिंग को लेकर फिलहाल कोई स्पष्ट नियम नहीं हैं। TRAI ने 2020 में ट्रैफिक मैनेजमेंट पर कुछ सुझाव दिए थे, लेकिन वे अभी तक कानून का रूप नहीं ले पाए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर नेटवर्क स्लाइसिंग कंटेंट के आधार पर भेदभाव न करे और इंटरनेट की बेसिक क्वालिटी को प्रभावित न करे, तो यह नेट न्यूट्रैलिटी का उल्लंघन नहीं है। लेकिन एयरटेल का प्लान सीधे तौर पर सर्विस क्वालिटी में अंतर ला रहा है।
रिलायंस जियो (Reliance Jio) भी इसी तरह की प्रीमियम 5G सर्विस लाने की तैयारी में है, लेकिन वह भी रेगुलेटरी क्लैरिटी का इंतज़ार कर रही है। एयरटेल की मार्केट कैप करीब ₹10.93 ट्रिलियन है और P/E रेश्यो लगभग 40.94 है। कंपनी औसत रेवेन्यू प्रति यूजर (ARPU) के मामले में सबसे आगे है, जिसे यह नई सर्विस और बेहतर बनाने में मदद कर सकती है।
आगे क्या?
TRAI फिलहाल 'वेट एंड वॉच' मोड में है और यह देख रहा है कि नेटवर्क स्लाइसिंग को कैसे लागू किया जाता है। रेगुलेटर का फैसला यह तय करेगा कि टेलीकॉम कंपनियां 5G टेक्नोलॉजी से कैसे कमाई करेंगी और भारत में इंटरनेट एक्सेस का भविष्य कैसा होगा। इंडस्ट्री की मांग है कि नेटवर्क स्लाइसिंग के लिए स्पष्ट नियम बनाए जाएं, ताकि 5G में हुए भारी निवेश की भरपाई हो सके और इनोवेशन को बढ़ावा मिले। TRAI के सामने सबसे बड़ी चुनौती ऑपरेटरों की व्यावसायिक ज़रूरतों और सभी के लिए समान इंटरनेट एक्सेस के सिद्धांत को संतुलित करना है।
