अमेरिकी कोर्ट ने xAI के खिलाफ डेटा सेंटर में बिना अनुमति गैस टर्बाइन इस्तेमाल करने से जुड़े मुकदमे को आगे बढ़ाने की मंजूरी दे दी है। यह फैसला AI इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए बढ़ती नियामक चुनौतियों की ओर इशारा करता है।
अमेरिकी फेडरल कोर्ट ने NAACP द्वारा xAI के खिलाफ दायर मुकदमे को खारिज करने से इनकार कर दिया है, जो कंपनी के लिए एक बड़ी कानूनी चुनौती है। जज Debra M. Brown ने उस याचिका को ठुकरा दिया, जिसमें xAI ने केस को खत्म करने की मांग की थी। आरोप है कि कंपनी का Memphis स्थित 'Colossus' डेटा सेंटर 35 गैस टर्बाइनों का इस्तेमाल कर रहा है, जिसके पास 'Clean Air Act' के तहत जरूरी पर्यावरणीय परमिट नहीं हैं।
टर्बाइनों का क्लासिफिकेशन बना विवाद की जड़
विवाद इस बात पर है कि डेटा सेंटर के पावर सिस्टम को कैसे वर्गीकृत किया जाए। xAI का तर्क था कि इन टर्बाइनों को 'मोबाइल सोर्स' माना जाना चाहिए, जिससे उन्हें स्थानीय पर्यावरणीय नियमों से छूट मिल जाती। लेकिन कोर्ट ने इस दलील को खारिज करते हुए कहा कि ये उपकरण कानूनी परिभाषा पर खरे नहीं उतरते। अब यह मामला कानूनी प्रक्रिया के अगले चरण में प्रवेश करेगा।
AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर बढ़ता रेगुलेटरी दबाव
बाजार के जानकारों के लिए यह फैसला बताता है कि AI के लिए जरूरी भारी-भरकम बिजली की खपत और इंफ्रास्ट्रक्चर अब नियामकों की कड़ी नजर में है। जैसे-जैसे कंपनियां बड़े कम्प्यूट क्लस्टर्स बना रही हैं, स्थानीय समुदायों और पर्यावरण एजेंसियों का दबाव बढ़ता जा रहा है।
यह मुकदमा उस ट्रेंड का हिस्सा है जहां टेक कंपनियों को डेटा सेंटर के बढ़ते फुटप्रिंट को लेकर कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ रही है। निवेशकों को इस बात पर नजर रखनी चाहिए कि क्या इन पर्यावरणीय अनुपालन (Environmental Compliance) के कारण कंपनियों का खर्च बढ़ेगा या उनके विस्तार की गति पर असर पड़ेगा।
