एग्री-इनपुट प्लेटफॉर्म nurture.retail ने वित्त वर्ष 2026 में अपने मंथली एक्टिव यूजर्स (MAU) में **35%** की प्रभावशाली बढ़ोतरी दर्ज की है। कंपनी अब मैन्युफैक्चरर्स के लिए एक डिजिटल स्टोरफ्रंट टूल लॉन्च करके अपने ऑपरेशंस को बढ़ाने की योजना बना रही है, जिससे एग्री-इनपुट खरीद की दक्षता में सुधार होगा।
35% यूजर्स का इजाफा
एग्री-इनपुट डिस्ट्रीब्यूशन प्लेटफॉर्म nurture.retail ने वित्त वर्ष 2026 के लिए अपने मंथली एक्टिव यूजर्स (MAU) की संख्या में 35% का इजाफा दर्ज किया है। कंपनी के अनुसार, भारत में हर चौथे एग्री-रिटेलर का रजिस्ट्रेशन प्लेटफॉर्म पर हो चुका है, और हर पांचवां रिटेलर हर महीने इसका इस्तेमाल कर रहा है। यह भारत की एग्रीकल्चर सप्लाई चेन के डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन में एक महत्वपूर्ण कदम है।
डिजिटल विस्तार और स्टोरफ्रंट रणनीति
अगले 12 से 24 महीनों में, कंपनी अपना फोकस डिजिटल फुटप्रिंट को बढ़ाने पर केंद्रित कर रही है। इस विस्तार का एक मुख्य हिस्सा नया डिजिटल स्टोरफ्रंट सॉल्यूशन है। यह टूल एक प्लग-एंड-प्ले सिस्टम के तौर पर काम करेगा, जिससे मैन्युफैक्चरर्स 24 घंटे के अंदर अपने ब्रांडेड ऑनलाइन स्टोर स्थापित कर सकेंगे। मैन्युफैक्चरर-से-रिटेलर मॉडल की ओर बढ़ने से, कंपनी एग्रीकल्चर वैल्यू चेन में डिमांड की विजिबिलिटी और खरीद प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने का लक्ष्य रखती है।
रणनीतिक निवेश और परिचालन फोकस
इस ग्रोथ को सपोर्ट करने के लिए, nurture.retail लॉजिस्टिक्स और टेक्नोलॉजी में कैपिटल लगा रही है। इसमें डिलीवरी की स्पीड में सुधार, विभिन्न ग्रामीण बाजारों के लिए मल्टीलिंगुअल इंटरफेस विकसित करना और सप्लाई-चेन एफिशिएंसी को बढ़ाना शामिल है। कंपनी प्लेटफॉर्म पर प्रोडक्ट कैटेगरी का विस्तार करने पर भी विचार कर रही है। इन पहलों का उद्देश्य रिटेलर एडॉप्शन और ट्रांजैक्शन फ्रीक्वेंसी दोनों को बढ़ाना है। प्लेटफॉर्म की प्रगति को ट्रैक करने वाले निवेशक रिपीट ट्रांजैक्शन वॉल्यूम, मैन्युफैक्चरर पार्टिसिपेशन और उन मार्केटों में प्लेटफॉर्म की सफलता को मॉनिटर करेंगे जहां अभी भी कम पैठ है।
बिजनेस मॉडल और इंडस्ट्री संदर्भ
भारत के एग्री-टेक सेक्टर में पारंपरिक सप्लाई चेन के डिजिटलीकरण पर फोकस बढ़ा है, जो अक्सर फ्रैग्मेंटेड होती है। एक सेंट्रलाइज्ड डिजिटल मार्केटप्लेस प्रदान करके, nurture.retail ऐसे स्पेस में प्रतिस्पर्धा कर रही है जहां रिटेलर्स और मैन्युफैक्चरर्स दोनों के लिए एफिशिएंसी और ट्रांसपेरेंसी प्रमुख हैं। चूंकि एग्रीकल्चर सेक्टर मौसमी मांग, कच्चे माल की उपलब्धता और लॉजिस्टिक्स लागत के प्रति अत्यधिक संवेदनशील है, इसलिए कंपनी की इस ग्रोथ रेट को बनाए रखने की क्षमता सप्लाई-चेन सुधारों के उसके एग्जीक्यूशन पर निर्भर करेगी। प्लेटफॉर्म के एक्टिव यूजर्स को बनाए रखने और मैन्युफैक्चरर ब्रांड्स के बीच अपनी पहुंच का विस्तार करने की कंपनी की क्षमता, जो प्लेटफॉर्म के मॉनेटाइजेशन और स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण हैं, पर भविष्य में नजर रखी जाएगी।
