eMudhra ने अपनी ग्लोबल TLS सर्टिफिकेट जेनरेशन प्रक्रिया में एक तकनीकी खामी की पहचान की है, जिसके चलते कुछ क्लाइंट्स के लिए सर्टिफिकेट्स को रिप्लेस करना जरूरी हो गया है। कंपनी का कहना है कि भारत में उनकी डिजिटल सिग्नेचर सर्विस पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा और कंपनी के कुल रेवेन्यू का सिर्फ 1% हिस्सा ही प्रभावित हुआ है।
eMudhra ने घोषणा की है कि वह अपने कुछ ग्लोबल ट्रांसपोर्ट लेयर सिक्योरिटी (TLS) ग्राहकों के लिए सर्टिफिकेट रिप्लेसमेंट की प्रक्रिया शुरू कर रही है। यह कदम एक तकनीकी खामी के सामने आने के बाद उठाया गया है। कंपनी ने बताया कि 30 अप्रैल, 2025 को हुई एक की-जेनरेशन घटना के दौरान गलती से कुछ कमजोर क्रिप्टोग्राफिक की (keys) भी जनरेट हो गई थीं, जिन्हें बाद में ब्राउज़र रूट स्टोर्स में पब्लिश कर दिया गया था। इससे इन कीज के रिवर्स-इंजीनियरिंग का खतरा बढ़ गया था।
यह समस्या कंपनी के ECC रूट के तहत आने वाली आठ इंटरमीडिएट सर्टिफिकेट अथॉरिटीज को प्रभावित करती है। इस खामी की जानकारी 17 अक्टूबर, 2026 को एक स्वतंत्र रिसर्चर द्वारा दी गई थी, जिन्होंने Google, Apple, Microsoft और Mozilla जैसे बड़े ब्राउज़र ऑपरेटरों को भी सचेत किया था।
फाइनेंशियल इम्पैक्ट और घरेलू सर्विस पर असर
बिजनेस के नजरिए से देखें तो इस घटना का दायरा कंपनी के ग्लोबल TLS ऑपरेशंस तक ही सीमित है, जो कंपनी के कुल रेवेन्यू का लगभग 1% है। कंपनी के मुख्य बिजनेस सेगमेंट, जैसे कि भारतीय डिजिटल सिग्नेचर सर्टिफिकेट (DSC) और eSign सेवाएं, पूरी तरह से अलग और स्वतंत्र इंफ्रास्ट्रक्चर पर काम करते हैं। ये घरेलू सेवाएं इस खामी से पूरी तरह अछूती हैं और सामान्य रूप से काम कर रही हैं।
कंपनी ने स्पष्ट किया है कि उसका इंफ्रास्ट्रक्चर पूरी तरह सुरक्षित है। आधिकारिक बयान के अनुसार, किसी भी तरह के अनधिकृत एक्सेस या डेटा ब्रीच का कोई सबूत नहीं मिला है। हालांकि, ग्लोबल क्लाइंट्स के लिए यह एक सुधारात्मक प्रक्रिया है, लेकिन निवेशकों के लिए यह समझना जरूरी है कि कंपनी को अब अंतरराष्ट्रीय स्टेकहोल्डर्स के साथ काम करते हुए अपनी साख को बनाए रखने की चुनौती का सामना करना पड़ेगा। आने वाले समय में कंपनी की प्राथमिकता ग्लोबल स्तर पर सर्टिफिकेट्स को सुरक्षित रूप से बदलना है ताकि कस्टमर सर्विस में कोई रुकावट न आए।
