In-App Ad Market: **$400 बिलियन** के मार्केट में हलचल, AppLovin की कानूनी मुश्किल और InMobi का **$1 बिलियन** का IPO

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AuthorMehul Desai|Published at:
In-App Ad Market: **$400 बिलियन** के मार्केट में हलचल, AppLovin की कानूनी मुश्किल और InMobi का **$1 बिलियन** का IPO

मोबाइल विज्ञापन की दुनिया तेजी से बदल रही है। वेब ट्रैकिंग की जगह अब SDK (सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट किट) ले रहे हैं, जिससे इन-ऐप विज्ञापन मार्केट **$400 बिलियन** तक पहुंच गया है। जहां एक तरफ AppLovin कानूनी पचड़ों में फंसी है, वहीं InMobi अपना **$1 बिलियन** का IPO लाने की तैयारी में है।

डिजिटल एडवरटाइजिंग की नींव अब बदल रही है। प्राइवेसी नियमों के चलते थर्ड-पार्टी कुकीज के कम होने से अब SDKs मोबाइल एडवरटाइजिंग का मुख्य जरिया बन गए हैं। ये किट्स ऐप्स के अंदर एक ब्रिज की तरह काम करते हैं, जिससे कंपनियां सीधे यूजर के डिवाइस पर टारगेटेड विज्ञापन दिखा सकती हैं।

AppLovin के लिए चुनौती

AppLovin इस ट्रेंड का बड़ा खिलाड़ी है, जिसने 2026 की दूसरी तिमाही में $1.92 बिलियन का रेवेन्यू दर्ज किया, जो सालाना आधार पर 53% की बढ़त है। लेकिन कंपनी की राह आसान नहीं है। AppLovin पर सिक्योरिटीज क्लास एक्शन मुकदमा चल रहा है, जो कंपनी के AI प्रोग्रेस और फाइनेंशियल परफॉर्मेंस से जुड़े दावों पर सवाल उठाता है। इसके अलावा, AI-बेस्ड विज्ञापन टूल्स को चलाने की भारी लागत भी मार्जिन पर दबाव डाल सकती है।

InMobi का इंडिया IPO प्लान

भारत की प्रमुख टेक कंपनी InMobi अपना $1 बिलियन का IPO लाने के लिए कमर कस रही है। इसके लिए कंपनी JPMorgan Chase, Jefferies, Kotak Mahindra Capital और Axis Capital के साथ काम कर रही है। खास बात यह है कि कंपनी सिंगापुर से भारत में शिफ्ट हो रही है, ताकि NSE और BSE पर लिस्टिंग की राह आसान हो सके।

हालांकि, निवेशकों को Glance प्लेटफॉर्म की हार्डवेयर निर्भरता और कंपनी पर मौजूद कर्ज (जो 10% से 19% के बीच ब्याज दर पर है) को ध्यान में रखना होगा। ये दोनों फैक्टर्स कंपनी की फाइनेंशियल फ्लेक्सिबिलिटी के लिए अहम हैं।

आगे क्या देखें?

निवेशकों के लिए दो बातें सबसे जरूरी हैं: पहला, कंपनियां AI की बढ़ती लागत को मैनेज करते हुए प्रॉफिट मार्जिन कैसे बचाती हैं, और दूसरा, InMobi के IPO का समय और AppLovin के कानूनी मामले का नतीजा। इस सेक्टर में लंबी अवधि का फायदा उन्हीं कंपनियों को मिलेगा जो प्राइवेसी नियमों और बढ़ती तकनीकी लागतों के बीच तालमेल बिठा सकेंगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.