AI में ग्लोबल फाउंडर्स का जलवा, पर फिनेंसिंग पर मंडराए खतरे: a16z

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AuthorAditya Rao|Published at:
AI में ग्लोबल फाउंडर्स का जलवा, पर फिनेंसिंग पर मंडराए खतरे: a16z

वेंचर कैपिटल फर्म Andreessen Horowitz (a16z) की रिपोर्ट के अनुसार, हालिया AI निवेशों में **44%** अंतरराष्ट्रीय फाउंडर्स की कंपनियों में हुए हैं। फर्म का मानना है कि ये स्टार्टअप ग्लोबल एंटरप्राइज डिमांड और अमेरिका के बाहर के टैलेंट का लाभ उठा रहे हैं। हालांकि, निवेशक अब AI से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर डेट और स्पेकुलेटिव फाइनेंसिंग जैसे जोखिमों पर भी बारीक नज़र रख रहे हैं।

AI में नई लहर: अब दुनिया भर के फाउंडर्स का दबदबा!

वेंचर कैपिटल की दुनिया में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है! Andreessen Horowitz (a16z) की एक नई रिपोर्ट बताती है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) स्टार्टअप्स में निवेश का ट्रेंड बदल रहा है। अब अमेरिका से बाहर के फाउंडर्स का दबदबा बढ़ रहा है। फर्म के पार्टनर्स, गैब्रियल वास्केज़ और एंजेल स्ट्रेंज के मुताबिक, उनके Apps Fund One और Two में हुए हालिया निवेशों में से 44% अंतरराष्ट्रीय फाउंडर्स की कंपनियों को मिले हैं।

क्यों अंतरराष्ट्रीय फाउंडर्स को मिल रहा है फायदा?

a16z का मानना है कि ये ग्लोबल फाउंडर्स एक खास एज (advantage) में हैं। वे अक्सर अपने मूल देश और सिलिकॉन वैली दोनों जगह अपनी मौजूदगी बनाए रखते हैं। इसकी वजह है एंटरप्राइज सेक्टर में आ रहे बदलाव। जहां अमेरिकी स्टार्टअप्स अपने ही कॉम्पिटिटिव मार्केट में उलझे हैं, वहीं दुनिया भर की पुरानी कंपनियां AI को अपनाने के लिए मजबूर हो रही हैं ताकि वे रेस में बनी रहें। इससे अंतरराष्ट्रीय फाउंडर्स को अपने देश के क्लाइंट्स को AI सॉल्यूशंस देने का एक बड़ा मौका मिल रहा है। इतना ही नहीं, सिलिकॉन वैली में टॉप AI इंजीनियर्स के लिए टैलेंट वॉर (talent war) बहुत महंगा हो गया है। इसी वजह से निवेशक अब यूरोप जैसे क्षेत्रों में मौजूद ग्लोबल टैलेंट पूल की ओर देख रहे हैं, जहां कई अकादमिक स्पिन-आउट्स (academic spin-outs) बड़ी भूमिका निभा रहे हैं।

फिनेंसिंग पर चिंता की लहर

जहां एक तरफ AI वेंचर्स का ग्लोबल विस्तार जोश भर रहा है, वहीं दूसरी तरफ AI में निवेश के बड़े परिदृश्य पर चिंता की तलवार भी लटक रही है। a16z और दूसरे वेंचर कैपिटलिस्ट्स इन स्टार्टअप्स को फंड कर रहे हैं, लेकिन बैंक फॉर इंटरनेशनल सेटलमेंट्स (BIS) जैसे बड़े ग्लोबल फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस ने AI बूम की टिकाऊपन (sustainability) पर सवाल उठाए हैं। BIS ने हाल ही में AI इंफ्रास्ट्रक्चर और कंप्यूटिंग पावर को फंड करने के लिए इस्तेमाल किए जा रहे भारी कर्ज (debt) से जुड़े जोखिमों को उजागर किया है।

सर्कुलर फाइनेंसिंग और भविष्य के संकेत

निवेशक अब 'सर्कुलर फाइनेंसिंग' (circular financing) के कॉन्सेप्ट पर बारीकी से नज़र रख रहे हैं। इसमें पैसा हाइपरस्केलर्स, चिप मैन्युफैक्चरर्स और AI स्टार्टअप्स के बीच एक ऐसे साइकिल में घूमता है, जिससे रिटर्न को लेकर अवास्तविक उम्मीदें पैदा हो सकती हैं। डेटा सेंटर्स बनाने और बड़े AI मॉडल्स को ट्रेन करने के लिए भारी कैपिटल एक्सपेंडिचर (capital expenditure) की जरूरत होती है। चिंता यह है कि इस ग्रोथ का एक बड़ा हिस्सा सिर्फ कर्ज से चल रहा है, न कि तुरंत होने वाली प्रॉफिटेबल डिमांड से। अगर AI निवेशों से मिलने वाला रिटर्न मौजूदा वैल्यूएशन (valuations) की ऊंची उम्मीदों पर खरा नहीं उतरा, तो मार्केट में फाइनेंशियल अस्थिरता आ सकती है।

AI सेक्टर पर नजर रखने वाले निवेशकों के लिए यह समझना जरूरी होगा कि कौन से AI एप्लीकेशन्स टिकाऊ और रेवेन्यू जेनरेट करने वाले हैं, और कौन से सिर्फ स्पेकुलेटिव फंडिंग पर निर्भर हैं। ग्लोबल फाउंडर्स का अमेरिकी मार्केट में आना इनोवेशन इकोसिस्टम को मजबूत कर रहा है, लेकिन इस ग्रोथ का भविष्य ग्लोबल इंटरेस्ट रेट्स और एंटरप्राइजेज के हाई स्पेंडिंग लेवल्स पर निर्भर करेगा। निवेशकों को बड़ी टेक कंपनियों और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोवाइडर्स की आने वाली अर्निंग रिपोर्ट्स पर ध्यान देना चाहिए, क्योंकि ये शायद पहली कड़ी होंगी जो बताएंगी कि AI पर होने वाला खर्च लॉन्ग-टर्म प्रॉफिट में बदल रहा है या अभी भी फिनेंसिंग कॉस्ट और डेट के दबाव में है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.