Quick-Commerce War: Zomato और Swiggy की नई रणनीति, डार्क स्टोर्स पर भारी निवेश से बदलेगी तस्वीर

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AuthorNeha Patil|Published at:
Quick-Commerce War: Zomato और Swiggy की नई रणनीति, डार्क स्टोर्स पर भारी निवेश से बदलेगी तस्वीर

क्विक कॉमर्स के दिग्गज Zomato और Swiggy अब बड़े डार्क स्टोर्स और ज्यादा प्रोडक्ट्स पर दांव लगा रहे हैं। इस रणनीति का मकसद ऑर्डर वैल्यू बढ़ाना है, लेकिन भारी खर्च से शॉर्ट टर्म में मार्जिन पर दबाव बढ़ सकता है।

भारत के क्विक-कॉमर्स सेक्टर में अब एक नए दौर की शुरुआत हो चुकी है। Amazon और Flipkart जैसी बड़ी रिटेल कंपनियों के बढ़ते दबदबे के बीच, Zomato (Blinkit) और Swiggy अब डिस्काउंट्स के बजाय इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने पर ध्यान दे रहे हैं।

डार्क स्टोर्स का बदलता स्वरूप

अब कंपनियां बड़े और ज्यादा जटिल डिलीवरी हब तैयार कर रही हैं। डार्क स्टोर सेटअप करने का खर्च फाइनेंशियल ईयर 2025 के ₹1 करोड़ से बढ़कर 2027 तक ₹2.5 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है। यही नहीं, इन सेंटर्स का औसत साइज भी 3,000 स्क्वायर फीट से बढ़ाकर 5,000 स्क्वायर फीट किया जा रहा है। इसका मकसद इलेक्ट्रॉनिक्स से लेकर घरेलू सामान तक ज्यादा वैरायटी रखना है, ताकि प्रति ऑर्डर वैल्यू (Average Order Value) बढ़ाई जा सके।

हालाँकि, यह भारी-भरकम इंफ्रास्ट्रक्चर खर्च मुनाफे (Profit Margins) के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकता है, क्योंकि इसे स्केल करने में कंपनी का काफी कैश खर्च होगा।

मार्जिन पर क्या होगा असर?

Blinkit ने अपने कॉन्ट्रिब्यूशन मार्जिन के लक्ष्य को 5-6% से बढ़ाकर 6% के ऊपरी स्तर पर सेट किया है। वहीं, Swiggy फिलहाल मार्केट शेयर बढ़ाने पर ज्यादा जोर दे रही है, जिससे अगले 2 सालों तक उनके मार्जिन पर दबाव बने रहने की आशंका है। फूड डिलीवरी सेगमेंट में Zomato के एडजस्टेड प्रॉफिट मार्जिन अभी भी Swiggy के मुकाबले बेहतर नजर आते हैं।

मार्केट में प्रतिस्पर्धा और जोखिम

क्विक-कॉमर्स में फिलहाल Zomato और Swiggy का ही बोलबाला है। जानकारों का मानना है कि इतनी बड़ी सप्लाई चेन और नेटवर्क खड़ा करने के लिए भारी निवेश की जरूरत होती है, जिसे देखते हुए नए प्लेयर्स के लिए इसे चुनौती देना फिलहाल आसान नहीं है। निवेशकों के लिए अब नजर इस बात पर होनी चाहिए कि क्या ये महंगे डार्क स्टोर्स वाकई में कंपनी के मुनाफे में इजाफा कर पाते हैं या फिर लागत बढ़ने से मार्जिन पर दबाव बना रहेगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.