Zomato के CEO, Deepinder Goyal ने Swiggy और Rapido जैसे प्रतिद्वंद्वियों के सस्ते फ़ूड डिलीवरी मॉडल्स पर सवाल उठाए हैं। उनका मानना है कि ये मॉडल्स टिकाऊ (sustainable) नहीं हैं। कंपनी अब 'Bistro' प्रोजेक्ट पर फोकस कर रही है ताकि कम कीमत वाले ऑर्डर्स के लिए डिलीवरी को बेहतर बनाया जा सके। Zomato ने जून तिमाही में **₹92 करोड़** का नेट प्रॉफिट दर्ज किया है, जो पिछले साल की तुलना में काफी ज्यादा है।
Detailed Coverage
'Bistro' प्रोजेक्ट में Zomato का भविष्य?
Zomato के फाउंडर और CEO, Deepinder Goyal ने बजट फ़ूड डिलीवरी सेगमेंट में Swiggy और Rapido जैसे प्रतिद्वंद्वियों से मिल रही चुनौती को कमतर आंका है। कंपनी की हालिया अर्निंग्स कॉल में उन्होंने कहा कि इन सस्ते डिलीवरी ऑफर्स में ग्राहकों की दिलचस्पी मुख्य रूप से भारी डिस्काउंट की वजह से है, न कि किसी मजबूत बिजनेस मॉडल की वजह से। Goyal के मुताबिक, Zomato के मुख्य ऑपरेशंस पर इसका असर सीमित रहा है और उन्होंने यह भी इशारा किया कि भारी छूट पर आधारित ग्रोथ को लंबे समय तक बनाए रखना मुश्किल है।
कीमत की जंग नहीं, 'Bistro' पर फोकस
कीमतों की जंग में उलझने के बजाय, Zomato अपना सारा ध्यान 'Bistro' प्रोजेक्ट पर लगा रही है। इस इनिशिएटिव का मकसद ₹50 से ₹150 के बीच की कीमत वाले आइटम्स के लिए डिलीवरी को मुनाफे वाला बनाना है। इसके लिए पूरी सप्लाई चेन को नए सिरे से डिजाइन किया जा रहा है। यह प्रोजेक्ट भारी डिस्काउंट के बजाय कस्टम किचन इक्विपमेंट, खास वर्कफ़्लो और ऑटोमेशन का इस्तेमाल करेगा, जो हाई-वॉल्यूम और लिमिटेड-मेनू फॉर्मेट्स के लिए तैयार किए गए हैं। कंपनी इसे मैन्युफैक्चरिंग-स्टाइल ऑपरेटिंग मॉडल की ओर एक कदम मानती है, जिसमें स्पीड और एफिशिएंसी को प्राथमिकता दी जाएगी।
दमदार तिमाही नतीजे
Zomato ने 2027 फाइनेंशियल ईयर की पहली तिमाही में ₹92 करोड़ का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट दर्ज किया है, जो पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में 268% की शानदार बढ़ोतरी है। कंपनी का रेवेन्यू ₹20,211 करोड़ रहा। कोर फ़ूड डिलीवरी बिजनेस में नेट ऑर्डर वैल्यू (NOV) 20% से बढ़कर ₹10,769 करोड़ हो गई। वहीं, क्विक कॉमर्स आर्म Blinkit ने भी ₹17,132 करोड़ के NOV के साथ मजबूत ग्रोथ दिखाई और ₹102 करोड़ का एडजस्टेड EBITDA हासिल किया।
Blinkit CEO का नजरिया
Blinkit के CEO, Albinder Dhindsa ने भी शॉर्ट-टर्म डिस्काउंट-आधारित ग्रोथ के बजाय लॉन्ग-टर्म इंफ्रास्ट्रक्चर पर कंपनी के फोकस को दोहराया। उन्होंने तर्क दिया कि केवल कीमत पर ध्यान केंद्रित करने से भारी कैश बर्न और कमजोर यूनिट इकोनॉमिक्स हो सकती है। इसके विपरीत, कंपनी लॉन्ग-टर्म ऑपरेटिंग लीवरेज बनाने के लिए भौगोलिक विस्तार और उत्पाद रेंज को बेहतर बनाने पर जोर दे रही है।
आगे की चुनौतियां
हालांकि कंपनी मजबूत ग्रोथ दिखा रही है, लेकिन निवेशकों को 'Bistro' प्रोजेक्ट से जुड़े एग्जीक्यूशन रिस्क पर नजर रखनी चाहिए। एक नया फ़ूड मैन्युफैक्चरिंग और सप्लाई चेन मॉडल विकसित करने में काफी ऑपरेशनल जटिलताएं शामिल हैं। इस रणनीति की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि क्या Zomato कम कीमत पर फ़ूड की क्वालिटी और कंसिस्टेंसी बनाए रख पाती है और साथ ही अपने नए किचन वर्कफ़्लो को बढ़ा पाती है। इसके अलावा, क्विक कॉमर्स सेक्टर में कॉम्पिटिशन कड़ा बना हुआ है, और इंफ्रास्ट्रक्चर और भौगोलिक पहुंच में लगातार निवेश आने वाली तिमाहियों में निवेशकों के लिए देखने लायक मुख्य क्षेत्र बना रहेगा।
