Zoho के लिए FY25 में मुश्किलें बढ़ गई हैं, जहाँ कंपनी का प्रॉफिट मार्जिन **34.8%** से गिरकर **27.8%** पर आ गया है। को-फाउंडर Sridhar Vembu ने चेतावनी दी है कि AI पर बढ़ता खर्च आर्थिक रूप से अब टिकाऊ नहीं रहा है।
मुनाफे पर क्यों पड़ रही मार?
AI इंफ्रास्ट्रक्चर की भारी लागत अब Zoho की फाइनेंशियल परफॉरमेंस पर साफ दिख रही है। कंपनी के कुल खर्च में जबरदस्त इजाफा हुआ है, जो पिछले साल के ₹4,899 करोड़ से बढ़कर FY25 में ₹6,234 करोड़ तक पहुंच गया है। डेटा सेंटर और कंप्यूटिंग हार्डवेयर की बढ़ती कीमतों के कारण कंपनी के प्रॉफिट मार्जिन में बड़ी गिरावट आई है। इसे देखते हुए Zoho ने अब नई हायरिंग की रफ्तार धीमी कर दी है और इंटरनल एफिशिएंसी पर ध्यान बढ़ा दिया है।
अब 'Deterministic AI' की ओर कदम
ऑपरेशनल लागत को काबू में रखने के लिए Zoho अब जेनरेटिव AI के बजाय 'Deterministic AI' पर जोर दे रही है। इसका मतलब है कि कंपनी Zia Chat जैसे उन टूल्स को प्राथमिकता देगी जो बिजनेस डेटा पर बेहतर कंट्रोल और गार्डरेल्स रखते हैं। इस रणनीति से कंपनी को महंगे 'टोकन' आधारित AI मॉडल पर कम निर्भर रहना पड़ेगा और कम कंप्यूटिंग पावर में बेहतर नतीजे मिलेंगे।
भविष्य की चुनौतियाँ और डेटा सेंटर्स
Zoho अपनी खुद की सॉवरेन डेटा सेंटर तकनीक विकसित करने पर विचार कर रही है, लेकिन Sridhar Vembu ने स्पष्ट किया है कि वे इस पर तब तक बड़ा निवेश नहीं करेंगे जब तक चिप और हार्डवेयर की कीमतें सामान्य नहीं हो जातीं। कंपनी उधार ली गई पूंजी पर काम करने से बच रही है क्योंकि AI से मिलने वाले रिटर्न पर अभी भी इंडस्ट्री में अनिश्चितता बनी हुई है। आने वाले समय में बड़ा सवाल यह होगा कि क्या कंपनी मार्जिन को स्थिर रख पाएगी या बढ़ती लागत का बोझ ग्राहकों पर पड़ेगा।
