Zoho Corporation ने छंटनी (Layoffs) का रास्ता चुनने के बजाय अपने कर्मचारियों को नई स्किल्स सिखाने का फैसला किया है। AI के बढ़ते खर्चों को मैनेज करने के लिए कंपनी ने सैलरी हाइक पर रोक और मार्केटिंग बजट में कटौती की है।
सॉफ्टवेयर सेक्टर में छंटनी के दौर के बीच, Zoho Corporation ने एक अलग और मानवीय रास्ता चुना है। कंपनी ने अपनी वर्कफोर्स को कम करने के बजाय उन्हें नए प्रोडक्ट रोल्स के लिए ट्रेन (Retrain) करने का फैसला लिया है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब पूरी टेक इंडस्ट्री पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को अपनाने के कारण भारी ऑपरेशनल दबाव बना हुआ है।
बढ़ते खर्चों का गणित
Zoho के फाउंडर श्रीधर वेंबू ने साफ किया है कि सर्वर की कीमतों में 4 गुना बढ़ोतरी कंपनी के मुनाफे पर बड़ा असर डाल रही है। इन बढ़ते खर्चों को कंट्रोल करने के लिए कंपनी ने दो बड़े कदम उठाए हैं:
- सैलरी हाइक पर फ्रीज: कर्मचारियों की सालाना सैलरी बढ़ोतरी पर फिलहाल रोक लगा दी गई है।
- मार्केटिंग खर्च में कटौती: गैर-जरूरी मार्केटिंग खर्चों को सीमित कर दिया गया है।
रिस्क और चुनौतियां
Airtable जैसी कई अन्य कंपनियां जहां अपने खर्च कम करने के लिए छंटनी का सहारा ले रही हैं, वहीं एक बूटस्ट्रैप्ड (Bootstrapped) कंपनी होने के नाते Zoho के पास अपने कैश फ्लो को मैनेज करने की चुनौती अधिक है।
हालांकि, सैलरी फ्रीज का फैसला कंपनी के लिए जोखिम भरा भी हो सकता है। टेक सेक्टर में टैलेंट रिटेंशन एक बड़ी चुनौती है और सैलरी न बढ़ने से कुशल कर्मचारियों के कंपनी छोड़ने का खतरा बना रहता है। अब मार्केट की नजरें इस पर टिकी हैं कि क्या Zoho की यह 'रिट्रेनिंग वाली स्ट्रैटेजी' उसे अपने कॉम्पिटिटर्स के मुकाबले आगे रख पाएगी या नहीं।
