Zoho Corporation के CEO Sridhar Vembu ने सॉफ्टवेयर इंडस्ट्री को ChatGPT और GitHub Copilot जैसे AI टूल्स पर बहुत ज्यादा निर्भर रहने के जोखिमों के प्रति आगाह किया है। यह निवेशकों के लिए एक बड़ी चेतावनी है कि कैसे तत्काल स्पीड के चक्कर में कंपनियां भविष्य के लिए बड़े 'मेंटेनेंस खर्च' और 'सॉफ्टवेयर क्रैश' का खतरा मोल ले रही हैं।
सॉफ्टवेयर बनाने के लिए आजकल GitHub Copilot, Claude और ChatGPT जैसे AI टूल्स का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। लेकिन Zoho के CEO Sridhar Vembu का मानना है कि अगर डेवलपर्स ने कोडिंग का बुनियादी ज्ञान खो दिया और पूरी तरह से AI पर निर्भर हो गए, तो यह इंजीनियरिंग स्किल्स के लिए एक बड़ा खतरा है। उनका तर्क है कि डेवलपर्स को उन सिस्टम्स की गहरी समझ होनी चाहिए जिन्हें वे बना रहे हैं, न कि पूरी तरह से AI के भरोसे रहना चाहिए।\n\nयह मामला भारतीय IT सेक्टर के निवेशकों के लिए चिंता का विषय है। फिलहाल TCS, Infosys, और HCLTech जैसी दिग्गज कंपनियां AI के जरिए अपनी प्रोडक्टिविटी बढ़ाने और लागत घटाने की होड़ में लगी हैं। शेयर बाजार में कंपनियां इस बात पर दांव लगा रही हैं कि AI के इस्तेमाल से मार्जिन में सुधार होगा। लेकिन Vembu की चेतावनी उन निवेशकों के लिए एक आईना है जो देख रहे हैं कि कहीं छोटी अवधि के मुनाफे के चक्कर में कंपनियां लंबे समय के लिए 'टेक्निकल डेट' (Technical Debt) न बढ़ा लें।\n\nटेक्निकल डेट का मतलब है कि अगर AI द्वारा बनाए गए कोड को इंजीनियर समझ या ठीक नहीं कर पाते हैं, तो भविष्य में उसे फिक्स करने का खर्च काफी ज्यादा हो सकता है। Zoho अपने सेल्फ-फंडेड मॉडल के लिए जानी जाती है, जो शॉर्ट-टर्म ग्रोथ के बजाय लॉन्ग-टर्म स्टेबिलिटी को प्राथमिकता देती है। निवेशकों को आने वाली तिमाही नतीजों में यह देखना होगा कि कौन सी कंपनियां AI की रफ्तार और मानवीय इंजीनियरिंग की गहराई के बीच सही संतुलन बना रही हैं।
