डिजिटल पेमेंट को और सुरक्षित बनाने के लिए Zeta और Pluxee ने RuPay प्रीपेड कार्ड्स पर पासकी (Passkey) आधारित ऑथेंटिकेशन शुरू किया है। अब एसएमएस ओटीपी (SMS OTP) की जगह बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन का इस्तेमाल होगा, जिससे पेमेंट फ्रॉड का खतरा कम होगा और ट्रांजैक्शन मात्र 7 सेकंड के भीतर पूरा हो जाएगा।
सुरक्षा में बड़ा बदलाव
लंबे समय से एसएमएस आधारित ओटीपी सिस्टम पर फिशिंग और सोशल इंजीनियरिंग हमलों का खतरा मंडरा रहा था। Zeta और Pluxee ने इस रिस्क को खत्म करने के लिए डिवाइस-बाउंड बायोमेट्रिक्स (जैसे फिंगरप्रिंट या फेस रिकग्निशन) को पेश किया है। यह नई टेक्नोलॉजी यूजर के डिवाइस पर लोकली स्टोर्ड क्रिप्टोग्राफिक की (Cryptographic keys) का इस्तेमाल करती है, जो सिस्टम को कहीं ज्यादा सुरक्षित बनाता है।
ट्रांजैक्शन की रफ्तार में उछाल
कंपनी के इंटरनल डेटा के अनुसार, पासकी ऑथेंटिकेशन से ट्रांजैक्शन समय घटकर मात्र 5 से 7 सेकंड रह जाएगा। पुराने तरीके में ओटीपी आने और उसे डालने में 15 से 25 सेकंड का वक्त लग जाता था। इस बदलाव से कार्ट अबैंडनमेंट (Cart Abandonment) की समस्या कम होगी और मर्चेंट्स के लिए कन्वर्जन रेट में सुधार आने की उम्मीद है।
रेगुलेटरी और स्ट्रैटेजिक महत्व
यह कदम भारतीय पेमेंट सेक्टर में आरबीआई (RBI) के उस विजन के अनुरूप है, जिसमें डिवाइस-बाउंड सुरक्षा को प्राथमिकता दी जा रही है। हाल ही में 3 अगस्त 2026 को Pluxee India को आरबीआई से 'पेमेंट एग्रीगेटर' (Payment Aggregator) का लाइसेंस मिला है, जिसके बाद कंपनी अपने डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को तेजी से विस्तार दे रही है।
चुनौतियां और भविष्य
हालांकि, यह टेक्नोलॉजी काफी एडवांस है, लेकिन इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि कितने यूजर्स के पास आधुनिक बायोमेट्रिक डिवाइस मौजूद हैं। ग्लोबल फिनटेक फेस्ट 2026 (Global Fintech Fest 2026) में इस टेक्नोलॉजी को पेश किया गया था। अब निवेशकों और स्टेकहोल्डर्स की नजर इस बात पर होगी कि RuPay जारी करने वाले अन्य प्लेटफॉर्म्स इसे कितनी जल्दी अपनाते हैं और यह फ्रॉड के आंकड़ों को घटाने में कितनी प्रभावी साबित होती है।
