जर्मन ऑप्टिक्स दिग्गज ZEISS ने जर्मनी के बाहर अपना पहला इनोवेशन हब IIT मद्रास रिसर्च पार्क में लॉन्च कर दिया है। यह सेंटर रोबोटिक्स, फ्लूइड डायनामिक्स और सेमीकंडक्टर टेक्नोलॉजी पर फोकस करेगा।
जर्मन ऑप्टिक्स और ऑप्टोइलेक्ट्रॉनिक्स कंपनी ZEISS ने आधिकारिक तौर पर जर्मनी के बाहर अपना पहला ग्लोबल इनोवेशन हब शुरू कर दिया है। चेन्नई स्थित IIT मद्रास रिसर्च पार्क में बना यह सेंटर कंपनी की टेक्नोलॉजी और IIT मद्रास के स्टार्टअप इकोसिस्टम को एक साथ लाएगा।\n\nयह नया सेंटर फ्रुगल इंजीनियरिंग, हार्श-एनवायरनमेंट ऑप्टिक्स, रोबोटिक्स और फ्लूइड डायनामिक्स जैसे क्षेत्रों में रिसर्च करेगा। ZEISS का लक्ष्य इस हब के जरिए भारत की इंजीनियरिंग प्रतिभा का लाभ उठाना और ग्लोबल सेमीकंडक्टर वैल्यू चेन में अपनी पकड़ मजबूत करना है।\n\n### कॉर्पोरेट स्ट्रक्चर और फाइनेंशियल स्थिति\n\nभारतीय निवेशकों के लिए यह जानना जरूरी है कि ZEISS एक प्राइवेट फाउंडेशन (Carl-Zeiss-Stiftung) के तहत काम करती है और भारतीय शेयर बाजारों में लिस्टेड नहीं है। ग्रुप की केवल एक लिस्टेड सब्सिडियरी, Carl Zeiss Meditec AG है, जो जर्मनी के फ्रैंकफर्ट स्टॉक एक्सचेंज पर ट्रेड करती है।\n\nवित्तीय मोर्चे पर ग्रुप को चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। फाइनेंशियल ईयर 2025/26 की पहली छमाही में पूरे ZEISS ग्रुप का रेवेन्यू केवल 1% बढ़कर 5.841 बिलियन यूरो रहा। वहीं, लिस्टेड कंपनी Carl Zeiss Meditec AG के रेवेन्यू में 9 महीनों के दौरान 2.9% की गिरावट आई है और इसका एडजस्टेड EBITA मार्जिन सिमटकर 8.0% रह गया है।\n\n### ऑपरेशनल रिस्क और चुनौतियां\n\nकंपनी ग्लोबल स्तर पर भू-राजनीतिक अस्थिरता और ट्रेड बैरियर्स के दबाव में है। खासकर चीन में रेगुलेटरी बदलावों और इंट्राओकुलर लेंस की मांग घटने से Carl Zeiss Meditec पर असर पड़ा है। इसके अलावा, सेमीकंडक्टर सेक्टर पर अधिक निर्भरता और विदेशी मुद्रा में उतार-चढ़ाव भी कंपनी के मुनाफे को प्रभावित कर रहे हैं। अब देखना यह होगा कि चेन्नई का यह नया हब कंपनी की लॉन्ग-टर्म पाइपलाइन को कितना मजबूती दे पाता है।
