Xiaomi अब अपने 'Human × Car × Home' स्ट्रैटेजी पर काम कर रही है। कंपनी ने **€24 बिलियन** के भारी-भरकम R&D निवेश का ऐलान किया है, लेकिन Q2 2026 में नेट इनकम में **43%** की भारी गिरावट ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है।
ग्लोबल विस्तार की बड़ी प्लानिंग
Xiaomi अब केवल स्मार्टफोन कंपनी बने रहने के बजाय एक बड़े टेक इकोसिस्टम के रूप में खुद को स्थापित कर रही है। बर्लिन में चल रहे IFA 2026 इवेंट में कंपनी ने अपनी 'Human × Car × Home' स्ट्रैटेजी पेश की, जो HyperOS के जरिए स्मार्टफोन, स्मार्ट होम अप्लायंसेज और इलेक्ट्रिक व्हीकल्स को एक साथ जोड़ती है। कंपनी का लक्ष्य हार्डवेयर सेल्स से हटकर एक यूनिफाइड AI-ड्रिवेन अनुभव प्रदान करना है।
यूरोप और भारत पर फोकस
Xiaomi ने पुष्टि की है कि वह 2027 तक यूरोप में अपनी इलेक्ट्रिक गाड़ियां लॉन्च करेगी, जिसकी शुरुआत जर्मनी से होगी। इसके साथ ही, कंपनी भारत और यूरोप के बाजारों में अपने 'Mijia' स्मार्ट-होम ब्रांड को आक्रामक रूप से बढ़ा रही है। भारत में कंपनी मैन्युफैक्चरिंग पार्टनर्स के साथ मिलकर लोकल प्रोडक्शन पर जोर दे रही है ताकि इंपोर्ट निर्भरता कम हो सके और स्मार्ट अप्लायंसेज की लागत घटे।
मुनाफे पर दबाव और मार्केट का रुख
हालांकि कंपनी का विजन बड़ा है, लेकिन हालिया फाइनेंशियल नतीजे चुनौतीपूर्ण हैं। Q2 2026 में कंपनी के रेवेन्यू में 6.1% की कमी आई और एडजस्टेड नेट इनकम में 43% की बड़ी गिरावट दर्ज की गई। इसकी मुख्य वजह मेमोरी कंपोनेंट की बढ़ती कीमतें और इलेक्ट्रॉनिक्स मार्केट में तगड़ा कॉम्पिटिशन है। बीते 12 महीनों में Xiaomi के शेयर में लगभग 47% की गिरावट देखने को मिली है।
R&D पर भारी खर्च: एक बड़ा रिस्क?
Xiaomi ने 2026 से 2030 के बीच रिसर्च और डेवलपमेंट (R&D) के लिए €24 बिलियन से ज्यादा खर्च करने का वादा किया है। यह पैसा रोबोटिक्स, सेमीकंडक्टर डिजाइन और स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग पर खर्च होगा। निवेशकों के लिए चिंता की बात यह है कि जब तक ऑटोमोटिव और स्मार्ट होम सेगमेंट मुनाफे में नहीं आते, तब तक यह भारी खर्च कंपनी की बैलेंस शीट पर दबाव बनाए रखेगा। अब देखना यह है कि क्या कंपनी आने वाली तिमाहियों में अपने प्रॉफिट मार्जिन को स्टेबल कर पाती है या नहीं।
