Wipro ने आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस के जरिए **20,000** फुल-टाइम कर्मचारियों के बराबर कार्यक्षमता हासिल कर ली है। कंपनी ने छंटनी करने के बजाय अपने स्टाफ को नई भूमिकाओं में तैनात करने का फैसला किया है। अब निवेशकों की नजर इस बात पर है कि क्या यह दक्षता कंपनी के प्रॉफिट मार्जिन और रेवेन्यू में दिखती है या नहीं।
एआई का 'ह्यूमन-एआई ऑपरेटिंग मॉडल'
Wipro ने 10 सितंबर 2026 को घोषणा की कि उसने एआई टूल्स का उपयोग करके 20,000 कर्मचारियों के बराबर प्रोडक्टिविटी हासिल की है। सबसे बड़ी बात यह है कि कंपनी ने इन लोगों को नौकरी से नहीं निकाला है, बल्कि उन्हें एक नए 'ह्यूमन-एआई ऑपरेटिंग मॉडल' के तहत जटिल कार्यों में शिफ्ट किया है। अब एआई दोहराव वाले तकनीकी काम संभालेगा, जबकि कर्मचारी हाई-वैल्यू प्रोजेक्ट्स पर ध्यान देंगे।\n\n### वर्कफोर्स का अपस्किलिंग
कंपनी ने अपने 1,00,000 से अधिक कर्मचारियों को एडवांस्ड एआई स्किल्स में ट्रेनिंग दी है। मकसद साफ है—ऑटोमेटेड एजेंट्स के दौर में खुद को रिलेवेंट बनाए रखना और सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट के नए तरीकों को अपनाना।\n\n### निवेशकों के लिए क्या है मायने?
इंडियन आईटी सेक्टर फिलहाल मार्जिन के दबाव से जूझ रहा है। हालांकि, यह दक्षता एक सकारात्मक संकेत है, लेकिन असल चुनौती यह है कि कंपनी इस तकनीकी सुधार को मुनाफे और रेवेन्यू में कैसे बदलती है। निवेशकों को इस बात का इंतजार है कि एआई इंफ्रास्ट्रक्चर पर हो रहे खर्च की भरपाई कंपनी कब तक करती है।\n\n### बाजार में मुकाबला और जोखिम
Tata Consultancy Services (TCS) और Infosys जैसे प्रतिस्पर्धी भी इस रेस में आगे हैं। Wipro ने एआई के कमर्शियल लक्ष्यों पर थोड़ा सतर्क रुख अपनाया है, जिससे निवेशकों की नजर इसके मॉनेटाइजेशन पर बनी हुई है। इसके अलावा, क्लाइंट्स द्वारा कीमतों में कटौती (Pricing Deflation) की मांग और एआई प्रोजेक्ट्स के एग्जीक्यूशन का रिस्क भी बना हुआ है।\n\nआने वाली तिमाहियों में यह देखना अहम होगा कि क्या ये एआई फायदे फाइनेंशियल रिपोर्ट्स में मार्जिन के तौर पर नजर आते हैं और क्या कंपनी नई डील्स जीतने में सफल रहती है।
