क्या AI में 'डॉट-कॉम' जैसा क्रैश आएगा?
AI को लेकर ये डर कि यह एक बड़ा बुलबुला है जो कभी भी फट सकता है, शायद गलत है। Macquarie के स्ट्रैटेजिस्ट Viktor Shvets का मानना है कि AI सेक्टर में 2000 के दशक की तरह कोई एक साथ बड़ा क्रैश (Systemic Collapse) नहीं आएगा।
इसके बजाय, हम देखेंगे कि AI के अलग-अलग सेक्टर्स में बारी-बारी से छोटे-छोटे बुलबुले बनेंगे और फूटेंगे। जब तक एक सेक्टर का वैल्यूएशन बहुत ज्यादा बढ़ जाएगा, तब तक पैसा दूसरे उभरते AI यूटिलिटी सेक्टर में चला जाएगा। इससे बाजार पूरी तरह से ठप्प नहीं होगा, जैसा 2000 में हुआ था।
क्यों वैल्यू स्टॉक्स में नहीं लौट रहा पैसा?
जो निवेशक 2022 की तरह वैल्यू स्टॉक्स में बड़े पैमाने पर निवेश की उम्मीद कर रहे हैं, उन्हें निराशा हो सकती है। उस समय महंगाई बहुत ज्यादा थी और सेंट्रल बैंक ब्याज दरें बढ़ा रहे थे, जिससे वैल्यू स्टॉक्स को फायदा हुआ था।
लेकिन अभी की बात अलग है। महंगाई 4% से नीचे है और ब्याज दरें भी न्यूट्रल लेवल के करीब पहुंच रही हैं। ऐसे में ग्रोथ स्टॉक्स को सजा देने वाली स्थितियां नहीं हैं।
इसके अलावा, ग्रोथ और वैल्यू स्टॉक्स के वैल्यूएशन में सिर्फ 1.3 से 1.4 गुना का अंतर रह गया है। इसका मतलब है कि मार्केट पहले से ही इन लो-मल्टीपल एसेट्स की रिकवरी को डिस्काउंट कर चुका है। जब तक ग्रोथ वाली कंपनियां बेहतर रिटर्न ऑन इक्विटी (ROE) देती रहेंगी, तब तक पैसा उन्हीं में लगा रहेगा।
'सर्कुलर फ्लो' का जोखिम
हालांकि AI का ट्रेंड अभी मजबूत दिख रहा है, लेकिन कुछ बड़े निवेशक इसके टिकाऊपन पर सवाल उठा रहे हैं। असली चिंता 'सर्कुलर रेवेन्यू फ्लो' को लेकर है।
इसका मतलब है कि कंपनियां AI स्टार्टअप्स को फंड कर रही हैं, और वो स्टार्टअप्स बदले में उन्हीं कंपनियों की सेवाएं खरीद रहे हैं। इससे ग्रोथ तो अच्छी दिखती है, लेकिन इसमें असली डिमांड की कमी होती है।
इसके अलावा, रेगुलेटरी दिक्कतें भी बड़ा सिरदर्द बन सकती हैं। AI डेटा प्राइवेसी और इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी को लेकर दुनिया भर की सरकारों की जांच के दायरे में है। इन वेंचर्स में भारी कैपिटल लगता है, और अगर डेट मार्केट या पब्लिक इक्विटी मार्केट में थोड़ी भी नरमी आई, तो कंपनियां दिवालिया हो सकती हैं।
जिन कंपनियों पर कर्ज ज्यादा है या जो वेंचर कैपिटल पर बहुत ज्यादा निर्भर हैं, वे सबसे पहले मुश्किल में आएंगी। ये बड़ी, कैश वाली और हाई-मार्जिन लीडर कंपनियों से अलग होंगी।
आगे की रणनीति
अब सबसे ज्यादा मुनाफा डिफेंसिव या सेक्टर-वाइड रोटेशन में नहीं मिलेगा। फोकस अब उन कंपनियों पर है जो 'जीरो-मार्जिनल-कॉस्ट' कर्व हासिल कर सकती हैं, यानी AI सॉल्यूशंस को स्केल करने में बहुत कम अतिरिक्त खर्च आता है। निवेशक अब ऐसी कंपनियों को प्राथमिकता दे रहे हैं जो यह एफिशिएंसी दिखा सकें, न कि सिर्फ कंप्यूटिंग पावर के लिए पैसा जला रही हों।
