राष्ट्रपति Donald Trump ने एक कार्यकारी आदेश जारी कर 'Artificial Intelligence' (AI) का नाम बदलकर 'Super Intelligence' (SI) कर दिया है। इसके साथ ही Google, Meta और NVIDIA जैसी 6 बड़ी कंपनियों ने एक स्वैच्छिक सुरक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसमें सख्त ऑडिट और इंटरनल कंट्रोल पर जोर दिया गया है।
आधिकारिक नाम में बदलाव
व्हाइट हाउस के इस नए आदेश के तहत अब सभी फेडरल सरकारी दस्तावेजों और संचार में AI के बजाय 'Super Intelligence' शब्द का इस्तेमाल अनिवार्य होगा। सरकार ने संबंधित विभागों को 60 दिन के भीतर मौजूदा कानूनों में संशोधन की रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है। यह कदम उन्नत ऑटोनॉमस सिस्टम को साधारण ऑटोमेशन से अलग करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
टेक दिग्गजों के साथ 'Joint Commitment'
प्रशासन ने Anthropic, Google, Meta, NVIDIA, OpenAI और xAI के साथ 'Joint Commitment on Frontier Responsibilities' नामक एक समझौता किया है। यह 'नैतिक रूप से बाध्यकारी' (morally binding) समझौता चार मुख्य सुरक्षा परतों पर आधारित है:
- साइबर और बायो-सिक्योरिटी जोखिमों की निगरानी के लिए मज़बूत इंटरनल कंट्रोल।
- इन सुरक्षा मानकों की देखरेख के लिए समर्पित आंतरिक टीमें।
- मॉडल व्यवहार की जांच के लिए स्वतंत्र एक्सटर्नल ऑडिटर्स की नियुक्ति।
- अकाउंटेबिलिटी सुनिश्चित करने के लिए बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की स्वतंत्र समिति।
निवेशकों के लिए क्या हैं मायने?
बाजार के जानकारों का मानना है कि फिलहाल यह फैसला न्यूट्रल है। सरकार ने सख्त कानूनी बाध्यताओं से बचकर इंडस्ट्री को खुद को रेगुलेट करने की छूट दी है, जिससे टेक कंपनियों के इनोवेशन पर लगाम नहीं लगेगी। डेटा सेंटर्स और कंप्यूटिंग पावर पर हो रहे भारी कैपिटल एक्सपेंडिचर पर फिलहाल कोई रेगुलेटरी रुकावट आती नहीं दिख रही है।
हालांकि, लॉन्ग-टर्म में एक रिस्क यह है कि अगर कंपनियां खुद को रेगुलेट करने में विफल रहती हैं, तो सरकार इसे कानून में बदल सकती है, जिससे भविष्य में कंप्लायंस कॉस्ट (Compliance Cost) बढ़ सकती है। निवेशकों को यह देखना होगा कि क्या यह 'सुरक्षा पर खर्च' कंपनियों के लिए बोझ बनता है या फिर नई गवर्नेंस और ऑडिटिंग सॉफ्टवेयर कंपनियों के लिए एक नया बिजनेस अवसर पैदा करता है।
