WhatsApp अब सिर्फ चैटिंग तक सीमित नहीं रहेगा। कंपनी ने 'प्रोग्रामेबल पेमेंट्स' (Programmable Payments) लॉन्च कर एक बड़ा बदलाव किया है। हालांकि भारत में **850 मिलियन** से ज्यादा यूजर्स होने के बावजूद, UPI मार्केट में इसकी हिस्सेदारी **1%** से भी कम है।
फिंटेक में WhatsApp का नया विजन
Global Fintech Fest 2026 में Meta ने अपने नए प्लान का खुलासा किया है। अब कंपनी का लक्ष्य साधारण मनी ट्रांसफर से आगे बढ़कर एक ऐसे इंटरफेस के रूप में काम करना है, जहाँ यूजर्स अपनी फाइनेंशियल जरूरतों को आसानी से पूरा कर सकें। इसके लिए WhatsApp ने Bharat Connect (पुराना नाम BBPS) को इंटीग्रेट किया है। अब यूजर्स ऐप से बाहर जाए बिना ही बिल पेमेंट, इंश्योरेंस और क्रेडिट कार्ड के भुगतान कर सकेंगे।
UPI मार्केट की कड़वी सच्चाई
जुलाई 2026 के आंकड़ों पर नजर डालें, तो WhatsApp Pay ने करीब 16.7 करोड़ ट्रांजैक्शंस प्रोसेस किए, जिनकी वैल्यू लगभग ₹12,957 करोड़ रही। ट्रांजैक्शन वॉल्यूम के हिसाब से यह देश में 8वें स्थान पर है, जो PhonePe और Google Pay जैसे दिग्गजों के मुकाबले काफी पीछे है।
बड़ी चुनौतियां क्या हैं?
Meta के सामने सबसे बड़ी चुनौती यूजर्स के व्यवहार को बदलना है। साथ ही, NPCI के कड़े रेगुलेटरी कैप्स (Volume Caps) कंपनी के तेजी से विस्तार करने की राह में बाधा बने हुए हैं। इसके अलावा, UPI ट्रांजैक्शंस का लो-मार्जिन मॉडल कंपनी के लिए मुनाफे को लेकर भी एक बड़ी पहेली बना हुआ है। अब देखना यह है कि क्या ये नए फीचर्स यूजर्स को आकर्षित कर पाएंगे और क्या WhatsApp अपनी मार्केट शेयर की स्थिति सुधार पाएगा या नहीं।
