Walmart अपनी ई-कॉमर्स रणनीति में बड़ा बदलाव कर रही है। कंपनी अब 'Agentic AI' और 'Sparky' जैसे स्मार्ट असिस्टेंट्स का सहारा ले रही है, जिसका पूरा कंट्रोल भारत में स्थित उनकी टीम के पास है।
एआई (AI) का नया रूप: 'Sparky' बनेगा शॉपिंग असिस्टेंट
Walmart अब पारंपरिक सर्च-आधारित शॉपिंग को पीछे छोड़कर 'Agentic AI' की ओर बढ़ रही है। इसमें सॉफ्टवेयर केवल रिजल्ट नहीं दिखाता, बल्कि एक प्रोएक्टिव असिस्टेंट की तरह काम करता है। 'Sparky' नाम का यह डिजिटल टूल ग्राहकों को शॉपिंग टास्क पूरा करने में मदद करेगा, जिससे ब्राउजर्स को बायर्स में बदलने और दोबारा खरीदारी (Repeat Sales) बढ़ाने में मदद मिलेगी।
भारत का दम: बेंगलुरु से ग्लोबल कंट्रोल
इस तकनीकी बदलाव की कमान पूरी तरह से भारत में मौजूद Walmart की टीम के पास है। बेंगलुरु स्थित कंपनी का Global Capability Center (GCC) अब केवल सपोर्ट यूनिट नहीं रहा, बल्कि यह ग्लोबल सप्लाई चेन का कंट्रोल टावर बन गया है। भारतीय इंजीनियरिंग टीमें अब अंतरराष्ट्रीय बाजार की रणनीतियों को सीधे प्रभावित कर रही हैं।
फिजिकल और डिजिटल का संगम
कंपनी ने अपनी 4,500 से ज्यादा स्टोर्स को सप्लाई चेन नोड्स में बदल दिया है। इस रणनीति का नतीजा यह है कि अमेरिका की 90% से अधिक आबादी तक 1 घंटे से कम समय में डिलीवरी पहुंच रही है। साथ ही, कंपनी का ड्रोन डिलीवरी ऑपरेशंस भी तेजी से बढ़ रहा है।
निवेशकों के लिए चुनौतियां और मौके
तकनीक और फिजिकल फुटप्रिंट का यह मेल प्रॉफिट मार्जिन बढ़ाने की कोशिश है। हालांकि, ऑटोनॉमस एआई को स्केल करने में डेटा सिक्योरिटी और सिस्टम स्टेबिलिटी जैसे जोखिम भी हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या एआई में किया गया भारी निवेश मुनाफे को बढ़ा पाएगा, या मेंटेनेंस की लागत शॉर्ट-टर्म फाइनेंशियल परफॉरमेंस पर बोझ डालेगी? आने वाले समय में मैनेजमेंट की कमेंट्री और टेक्नोलॉजी पर हो रहे कैपिटल खर्च पर नजर रखना निवेशकों के लिए जरूरी होगा।
