Visa का बड़ा दांव: AI सुरक्षा टूल्स किए ओपन-सोर्स, साइबर खतरों से निपटने की तैयारी

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
Visa का बड़ा दांव: AI सुरक्षा टूल्स किए ओपन-सोर्स, साइबर खतरों से निपटने की तैयारी

Visa ने अपने AI-आधारित साइबर सिक्योरिटी इंफ्रास्ट्रक्चर के कुछ हिस्सों को ओपन-सोर्स कर दिया है। Anthropic के Mythos मॉडल द्वारा सुरक्षा खामियों का पता चलने के बाद कंपनी ने यह बड़ा कदम उठाया है।

सुरक्षा का नया मॉडल: एजेंटिक डिफेंस (Agentic Defense)

पारंपरिक सुरक्षा सिस्टम अब इंसानी निगरानी तक ही सीमित नहीं रह गए हैं। Visa अब 'एजेंटिक डिफेंस' की ओर बढ़ रहा है, जहाँ AI मॉडल खुद ही स्वायत्त (autonomous) तरीके से काम करेंगे। ये सिस्टम रीयल-टाइम में उन साइबर हमलों को डिटेक्ट और काउंटर करने में सक्षम हैं, जो खुद को लगातार अपडेट कर रहे हैं। कंपनी का मानना है कि साइबर खतरों की रफ्तार और दायरा इंसानी सुरक्षा प्रोटोकॉल से कहीं ज्यादा तेज हो चुका है।

निवेशकों के लिए क्यों है यह जरूरी?

Visa सालाना लगभग $15 ट्रिलियन के ट्रांजैक्शन प्रोसेस करता है। ऐसे में नेटवर्क की सुरक्षा कंपनी की सबसे बड़ी एसेट है। डेटा के मुताबिक, साल 2030 तक कुल ऑनलाइन ट्रांजैक्शन का एक-तिहाई हिस्सा AI एजेंट्स के जरिए होगा। कंपनी का ओपन-सोर्स कदम न केवल सुरक्षा को मजबूत करेगा, बल्कि ट्रांजैक्शन की स्पीड और कंज्यूमर ट्रस्ट को बनाए रखने में भी मदद करेगा।

भविष्य की चुनौती: क्वांटम कंप्यूटिंग

Visa सिर्फ वर्तमान खतरों पर नहीं, बल्कि भविष्य की चुनौतियों पर भी नजर रख रही है। कंपनी 'शोर एल्गोरिथम' (Shor’s algorithm) जैसे खतरों से निपटने की तैयारी कर रही है, जो भविष्य में मौजूदा एन्क्रिप्शन को तोड़ सकते हैं। यह कदम साबित करता है कि Visa डिजिटल ट्रांजैक्शन के भविष्य को लेकर काफी सतर्क है। निवेशक अब इस बात पर नजर रखेंगे कि यह ओपन-सोर्स रणनीति कंपनी के साइबर सिक्योरिटी खर्च को कैसे प्रभावित करती है और क्या यह पूरे इंडस्ट्री के लिए एक नया बेंचमार्क बन पाएगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.