डिजिटल पेमेंट्स में अब एक बड़ा बदलाव आने वाला है! Visa ने भारत में 'Payment Passkey' लॉन्च कर दिया है। इस नई टेक्नोलॉजी की मदद से आप पासवर्ड या वन-टाइम कोड (OTP) की जगह फिंगरप्रिंट या चेहरे की पहचान जैसे बायोमेट्रिक्स का इस्तेमाल करके अपने डिजिटल पेमेंट्स को पूरा कर सकेंगे।
ये क्या है और कैसे काम करेगा?
Visa की यह नई 'Payment Passkey' टेक्नोलॉजी भारतीय डिजिटल पेमेंट सिस्टम में एक नया अध्याय शुरू कर रही है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) से मंजूरी मिलने के बाद, यह FIDO स्टैंडर्ड पर आधारित है। इसका मतलब है कि अब आपको ऑनलाइन शॉपिंग या बिल पेमेंट करते समय OTP का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। आपका फिंगरप्रिंट या फेस स्कैन ही आपके पेमेंट को सुरक्षित बना देगा।
OTP की जगह बायोमेट्रिक्स क्यों?
आजकल ऑनलाइन धोखाधड़ी (Fraud) के मामले बढ़े हैं, और OTP इसका एक बड़ा जरिया बन गया है। हैकर्स अक्सर OTP चुराकर आपके अकाउंट से पैसे निकाल लेते हैं। Visa की यह नई पहल इसी सुरक्षा खामी को दूर करने के लिए है। बायोमेट्रिक्स का इस्तेमाल करके, यह फ्रॉड को काफी हद तक कम करेगा और साथ ही पेमेंट प्रोसेस को भी तेज बनाएगा। सोचिए, बार-बार OTP डालने की झंझट से मुक्ति!
कौन-कौन कर रहा है सपोर्ट?
Visa इस टेक्नोलॉजी को अकेले नहीं ला रहा है, बल्कि कई बड़े प्लेयर्स इसका हिस्सा हैं। शुरुआती दौर में Myntra, Paytm, MakeMyTrip और Tata Starbucks जैसी बड़ी कंपनियां इसे अपने प्लेटफॉर्म पर लागू कर रही हैं। पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए Razorpay, PayU, Juspay, Pine Labs और BillDesk जैसे बड़े फिनटेक प्रोवाइडर्स भी इसका सपोर्ट कर रहे हैं। इससे यह उम्मीद जगती है कि यह टेक्नोलॉजी तेजी से फैलेगी।
क्या होंगी दिक्कतें?
हालांकि, इस नई टेक्नोलॉजी को अपनाने में कुछ चुनौतियां भी हैं। सबसे पहली बात, सभी व्यापारियों और पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स को इसे अपने सिस्टम में इंटीग्रेट करना होगा। दूसरी चुनौती है लोगों की आदतें। लोग OTP के आदी हो चुके हैं, उन्हें बायोमेट्रिक्स वाले इस नए सिस्टम को समझने और अपनाने में समय लग सकता है। इसके अलावा, यह टेक्नोलॉजी ऐसे डिवाइसेस पर ही काम करेगी जिनमें बायोमेट्रिक सुविधा (जैसे फिंगरप्रिंट स्कैनर या फेस रिकॉग्निशन) मौजूद हो, ऐसे में पुराने डिवाइसेस वाले यूजर्स को थोड़ी मुश्किल हो सकती है।
निवेशकों को क्या देखना चाहिए?
निवेशकों और मार्केट एनालिस्ट के लिए यह देखना अहम होगा कि व्यापारी कितनी जल्दी इस टेक्नोलॉजी को अपनाते हैं और क्या इससे पेमेंट फ्रॉड में कमी आती है। RBI का रुख भी महत्वपूर्ण रहेगा; अगर यह सिस्टम सफल होता है, तो भविष्य में डिजिटल सुरक्षा के नियम इसी दिशा में जा सकते हैं। साथ ही, Razorpay और PayU जैसी कंपनियों के लिए यह एक बड़ा अवसर हो सकता है।
