वाराणसी शहर तीर्थयात्रियों और पर्यटकों की भारी भीड़ को संभालने के लिए अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद ले रहा है। शहर में नई AI-आधारित सेंसर और रंग-संकेत वाली नेविगेशन प्रणाली (navigation system) लागू की जा रही है, जिससे 17 करोड़ सालाना पर्यटकों के आने से होने वाली भीड़ को नियंत्रित किया जाएगा।
AI से भीड़ प्रबंधन, वाराणसी में रियल-टाइम मॉनिटरिंग
वाराणसी, जिसकी आबादी जहां 36 लाख है, वहीं 2025 में शहर ने 17 करोड़ से अधिक पर्यटकों का स्वागत किया। इस भारी भीड़ को संभालने के लिए शहर अब हाई-टेक समाधानों की ओर बढ़ रहा है।
हाल ही में, Toyota Mobility Foundation के $3 मिलियन Sustainable Cities Challenge में सिटीफ्लो (CityFlow) और जानयात्रा (Janjatra) नामक दो प्रोजेक्ट विजेताओं के रूप में उभरे हैं। ये प्रोजेक्ट काशी विश्वनाथ मंदिर के पास वास्तविक समय (real-time) में भीड़ की निगरानी और वैकल्पिक रास्तों के लिए मदद करेंगे।
सिटीफ्लो (CityFlow), CityData.AI और Nippon Koei द्वारा विकसित, शहर के प्रमुख स्थानों जैसे दशाश्वमेध घाट या गडोइया में पैदल चलने वालों की घनत्व (density) को मॉनिटर करेगा। शहर में लगे सेंसर से मिली जानकारी के आधार पर, सिस्टम भविष्यवाणी करेगा कि कब भीड़ खतरनाक स्तर तक पहुंच सकती है। इससे अधिकारियों को पहले से अलर्ट मिल जाएगा और वे पुलिस और आपातकालीन सेवाओं को संवेदनशील इलाकों में तैनात कर सकेंगे। अभी यह प्रणाली 8 जगहों पर काम कर रही है, जिसे बढ़ाकर 50 और फिर 100 जगहों तक ले जाने की योजना है।
जानयात्रा (Janjatra), The Urbanizer द्वारा विकसित, लोगों को भीड़-भाड़ वाले रास्तों से बचाकर कम भीड़ वाले गलियारों से मंदिर तक पहुंचाने का काम करेगा। यह रंग-संकेतों का इस्तेमाल करेगा। उदाहरण के लिए, पीला रंग मुख्य मंदिर मार्ग, जबकि नीला और लाल रंग घाटों और निकास द्वारों को दर्शाएगा। इसके अलावा, CCTV के ज़रिए लेन की घनत्व की निगरानी की जाएगी। अगर कोई रास्ता बहुत ज़्यादा भीड़ वाला हो जाता है, तो डिजिटल साइनेज (digital signage) तुरंत वैकल्पिक, कम भीड़ वाले रास्तों का सुझाव देगा।
फंडिग और भविष्य की योजना
Toyota Mobility Foundation इन टेक्नोलॉजी प्रोवाइडर्स को एक साल के लिए फंड देगा। इसके बाद, उत्तर प्रदेश सरकार भी इन तकनीकों को बड़े पैमाने पर अपनाने में मदद करने में रुचि दिखा चुकी है। यह देखना दिलचस्प होगा कि ये सिस्टम मौजूदा सरकारी ढांचे में कैसे फिट होते हैं और क्या इन्हें भारत के अन्य धार्मिक और पर्यटन स्थलों के लिए एक मॉडल के रूप में अपनाया जा सकता है।
