IT मंत्री अश्विनी वैष्णव ने सेमीकंडक्टर कंपनियों को साइबर सुरक्षा मजबूत करने की सलाह दी है। भारत 'Semicon 2.0' योजना के तहत **₹1.27 लाख करोड़** का निवेश कर रहा है, जिसके चलते डिजिटल सुरक्षा अब निवेशकों के लिए एक महत्वपूर्ण पैरामीटर बन गई है।
आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव की यह चेतावनी बताती है कि भारत का सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग हब बनने का सफर ग्लोबल स्तर पर निगरानी के दायरे में है। जैसे-जैसे भारत असेंबली से आगे बढ़कर हाई-एंड डिजाइन और फैब्रिकेशन की ओर बढ़ रहा है, सरकार का फोकस सिर्फ निवेश आकर्षित करने से हटकर इन महत्वपूर्ण संपत्तियों (Critical Assets) की सुरक्षा पर शिफ्ट हो गया है। हकीकत यह है कि सेमीकंडक्टर प्लांट केवल कारखाने नहीं, बल्कि सामरिक महत्व के 'टेक्नोलॉजी हब' हैं, जो साइबर हमलों का आसान शिकार हो सकते हैं।
बड़े निवेश और Semicon 2.0 का जोर
यह चेतावनी ₹1,27,500 करोड़ के सरकारी आउटले वाले 'Semicon 2.0' इनिशिएटिव के दौरान आई है। पहले फेज में भारत ने ₹1.64 लाख करोड़ का निवेश पहले ही हासिल कर लिया है। बड़ी कंपनियां जैसे Applied Materials, Lam Research, और Tata Electronics बड़े दांव लगा रही हैं। Applied Materials ने 2035 तक के लिए $5 बिलियन का निवेश प्लान रखा है, जबकि टाटा ग्रुप धोलेरा (Dholera) में एक बड़ा वेंडर पार्क विकसित कर रहा है।
निवेशकों के लिए क्या हैं मायने?
सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग एक बहुत ही कैपिटल-इंटेंसिव सेक्टर है। इसमें मुनाफा कमाने में लंबा समय लगता है। सरकारी सब्सिडी शुरुआती दबाव तो कम करती है, लेकिन कंपनियों की असली सफलता उनके 'एग्जीक्यूशन' (Execution) और साइबर सुरक्षा के प्रति गंभीरता पर टिकी है। किसी भी तरह की डिजिटल सुरक्षा चूक या फिजिकल इन्फ्रास्ट्रक्चर में रुकावट सीधे ऑपरेशनल कॉस्ट बढ़ा सकती है और प्रोजेक्ट की डेडलाइन को पीछे धकेल सकती है।
अगले कुछ क्वार्टर में निवेशकों को इस बात पर नजर रखनी चाहिए कि कंपनियां इन मल्टी-बिलियन डॉलर प्रोजेक्ट्स को कितनी तेजी और सुरक्षा के साथ आगे बढ़ाती हैं। कैपिटल खर्च और ऑपरेशनल स्टेबिलिटी के बीच का संतुलन ही तय करेगा कि इन कंपनियों की लॉन्ग-टर्म वैल्यू क्या होगी।
