बेंगलुरु की हेल्थ-टेक स्टार्टअप Ultrahuman ने **$7 करोड़** की फंडिंग जुटाई है। यह राउंड Qualcomm Ventures के नेतृत्व में हुआ है, जिससे कंपनी की वैल्यूएशन **$36.5 करोड़** पहुंच गई है।
स्मार्ट रिंग में AI का तड़का
Qualcomm के साथ इस नई साझेदारी का सीधा मकसद स्मार्ट रिंग को केवल फिटनेस ट्रैकर से आगे ले जाकर एक 'AI-पावर्ड कंप्यूटर' बनाना है। कंपनी अब अपनी रिंग में खास चिप्स का इस्तेमाल करेगी, जिससे हेल्थ डेटा की प्रोसेसिंग फोन के बजाय सीधे रिंग के अंदर ही हो सकेगी। इससे यूजर्स को रियल-टाइम हेल्थ अपडेट्स और बेहतर फीचर्स मिलेंगे।
फाइनेंशियल सेहत और बिजनेस मॉडल
ज्यादातर स्टार्टअप्स के उलट, Ultrahuman ने फाइनेंशियल ईयर 2025 में प्रॉफिट कमाकर सबको चौंकाया है। कंपनी का नेट प्रॉफिट लगभग ₹73 करोड़ रहा है। कंपनी का फोकस अब हार्डवेयर के साथ-साथ सब्सक्रिप्शन मॉडल पर भी है, जो उन्हें बार-बार होने वाली कमाई (recurring income) का मौका दे रहा है।
कानूनी पेंच और चुनौतियां
रास्ता पूरी तरह साफ नहीं है। कंपनी पहले भी अमेरिकी बाजार में अपनी प्रतिद्वंदी Oura के साथ पेटेंट विवादों में फंस चुकी है, जिसके कारण कुछ समय के लिए एक्सपोर्ट पर रोक लगी थी। हालांकि, 'Ring Pro' के डिजाइन में बदलाव के बाद कंपनी ने वापसी की है, लेकिन भविष्य में ऐसे कानूनी विवाद कंपनी की ग्रोथ पर असर डाल सकते हैं।
फिलहाल, Ultrahuman एक प्राइवेट कंपनी है, इसलिए यह शेयर बाजार में लिस्टेड नहीं है। इसकी सफलता अब पूरी तरह से इस बात पर टिकी है कि यह नई AI तकनीक को कितनी कुशलता से बाजार में उतारती है और अपने प्रॉफिट मार्जिन को कैसे बरकरार रखती है।
