Uber Technologies ने मैनेजमेंट को सरल बनाने और कामकाज में तेजी लाने के लिए अपनी कुल वर्कफोर्स के **10%** यानी **3,300** पदों को कम करने का फैसला किया है। कंपनी अब अपना पूरा ध्यान डिलीवरी और ऑटोनॉमस व्हीकल प्रोजेक्ट्स पर केंद्रित करेगी।
मैनेजमेंट का नया स्ट्रक्चर
कंपनी के CEO दारा खोसरोशाही का मानना है कि कंपनी का ऑर्गेनाइजेशनल स्ट्रक्चर काफी भारी हो गया था। इसे ठीक करने के लिए Uber अब अपने कुल मैनेजर्स की संख्या में 20% की कटौती कर रही है। इन मैनेजर्स को अब सुपरविजन के बजाय सीधे प्रोडक्ट डेवलपमेंट के कामों में लगाया जाएगा। इसके साथ ही, कंपनी अपनी कई डिलीवरी टीमों को मिलाकर एक यूनिट बना रही है, ताकि काम करने के तरीके को आसान और मुनाफे को बेहतर बनाया जा सके।
ऑटोनॉमस टेक्नोलॉजी पर दांव
छंटनी से बचने वाले फंड को कंपनी अब ऑटोनॉमस व्हीकल टेक्नोलॉजी और डिलीवरी बिजनेस में निवेश करेगी। कंपनी का लंबे समय से 'रोबोटैक्सी' पार्टनरशिप पर फोकस है, जिसे वह भविष्य के मोबिलिटी मार्केट में अपना सबसे बड़ा प्लस पॉइंट मानती है। हालांकि, यह क्षेत्र काफी कैपिटल-इंटेंसिव है, जिसके चलते निवेशक अभी भी कंपनी की डेवलपमेंट कॉस्ट और भविष्य के मुनाफे को लेकर सावधानी बरत रहे हैं।
वर्क-फ्रॉम-होम पर लगा फुल स्टॉप
स्ट्रक्चरल बदलावों के साथ ही Uber ने अपने कर्मचारियों के लिए कड़ा 'रिटर्न-टू-ऑफिस' नियम लागू किया है। अब कंपनी में केवल 1% कर्मचारी ही पूरी तरह रिमोट काम कर पाएंगे। इस फैसले के बाद शेयर बाजार ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है और Uber के शेयर में करीब 2% का इजाफा दर्ज किया गया है।
आर्थिक स्थिति और कर्ज का बोझ
फिलहाल, कंपनी पर लगभग $12.7 बिलियन का लॉन्ग-टर्म कर्ज है। हालांकि, एनालिस्ट्स का मानना है कि कर्ज को मैनेज करना अभी मुमकिन है, लेकिन कंपनी के पास गलती करने की गुंजाइश कम है। अब पूरी नजर इस बात पर है कि क्या यह नई रणनीति कंपनी के प्रॉफिट मार्जिन को सुरक्षित रख पाती है या नहीं।
