Uber ने अपने पूरे ग्लोबल वर्कफोर्स के लिए ChatGPT Enterprise को रोलआउट करने का फैसला लिया है। कंपनी का लक्ष्य एडमिनिस्ट्रेटिव कामकाज को आसान बनाकर काम की रफ्तार और एफिशिएंसी को बढ़ाना है।
वर्क कल्चर में बड़ा बदलाव
Uber ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को अपने बिजनेस का मुख्य हिस्सा बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। इससे पहले कंपनी ने 1,000 कर्मचारियों के साथ एक पायलट प्रोजेक्ट चलाया था, जिसमें 80% हिस्सा फाइनेंस और ऑपरेशंस जैसी नॉन-इंजीनियरिंग टीमों का था। यह साफ तौर पर बताता है कि कंपनी रूटीन एडमिनिस्ट्रेटिव कामों के लिए अब पूरी तरह AI पर निर्भर होने की तैयारी कर रही है।
कैसे काम करेगा यह नया सिस्टम?
Uber ने इसके लिए विशेष 'AI पॉड्स' बनाए हैं। कंपनी का इरादा है कि AI के जरिए डैशबोर्ड बनाने, अलग-अलग देशों के लिए ट्रेनिंग कंटेंट तैयार करने और ऑपरेशनल डेटा को चुटकियों में एनालाइज करने जैसे काम ऑटोमेट किए जाएं। अभी तक इन कामों में काफी मैन्युअल इनपुट और समय लगता था, जिसे अब कम करने की कोशिश की जा रही है।
निवेशकों के लिए क्या है जोखिम?
हालांकि कंपनी ने इस डील की लागत का खुलासा नहीं किया है, लेकिन निवेशकों के लिए असली चुनौती यह देखना है कि क्या यह भारी-भरकम सॉफ्टवेयर सब्सक्रिप्शन भविष्य में मुनाफे में दिखता है या नहीं। इसके अलावा, डेटा सिक्योरिटी का जोखिम भी बड़ा है, क्योंकि इन सिस्टम्स में ड्राइवर्स और राइडर्स से जुड़ी सेंसिटिव जानकारी होती है। अगर सुरक्षा में चूक हुई, तो कंपनी को रेगुलेटरी जांच और भारी साख का नुकसान उठाना पड़ सकता है।
AI बाजार में छिड़ी जंग
यह कदम OpenAI के लिए एक बड़ी जीत है, जो Microsoft, Google और Anthropic जैसे दिग्गजों को टक्कर देने की होड़ में है। Uber का उदाहरण अब OpenAI के लिए एक सेल्स टूल की तरह काम करेगा, जिससे वह अन्य बड़ी कंपनियों को अपनी ओर खींच सके। अब बाजार की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या Uber का यह 'AI दांव' आने वाली तिमाहियों में कंपनी के मार्जिन को बेहतर कर पाएगा या सिर्फ एक महंगा प्रयोग बनकर रह जाएगा।
