Wall Street हफ्ते के अंत में बढ़त के साथ बंद हुआ। Microsoft और Akamai जैसी दिग्गज कंपनियों में AI-ड्रिवन ग्रोथ ने हाई इंटरेस्ट रेट्स और कच्चे तेल की कीमतों के दबाव को बेअसर कर दिया। भारतीय निवेशकों के लिए, यह ग्लोबल टेक स्पेंडिंग के संकेत हैं, जो भारत के IT सेक्टर और FII फ्लो पर गहरा असर डालते हैं।
Wall Street का माहौल इस हफ्ते काफी सकारात्मक रहा, जहां निवेशकों ने कर्ज की बढ़ती लागत यानी ब्याज दरों के दबाव को दरकिनार कर दिया। अमेरिकी 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड (US 10-year Treasury yield) 19 साल के उच्चतम स्तर 5.196% पर पहुंच गई, लेकिन इसके बावजूद टेक्नोलॉजी शेयरों की मांग कम नहीं हुई।
टेक सेक्टर का दमदार प्रदर्शन
मार्केट को सहारा देने का काम टेक कंपनियों ने बखूबी किया। Microsoft के शेयरों में 3.7% का उछाल दिखा, जिसकी वजह उनके 'Copilot' प्लेटफॉर्म के नए फीचर्स रहे। साथ ही, Akamai Technologies ने AI स्टार्टअप Anthropic के साथ $11.6 बिलियन की बड़ी क्लाउड सर्विसेज डील की घोषणा की है, जिसमें 5% इक्विटी हिस्सेदारी की संभावना है। Qualcomm और Dell जैसे हार्डवेयर दिग्गजों में भी तेजी देखने को मिली क्योंकि दुनिया भर में AI इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए निवेश बढ़ रहा है।
भारतीय बाजार पर क्या होगा असर?
भारतीय निवेशकों के लिए यह खबर काफी अहम है। TCS, Infosys, और HCLTech जैसी दिग्गज IT कंपनियां अपने अमेरिकी क्लाइंट्स के खर्च पर निर्भर करती हैं। अगर अमेरिकी फर्में AI में लगातार निवेश कर रही हैं, तो यह भारतीय IT सेक्टर के लिए अच्छी खबर है। हालांकि, फेड रिजर्व द्वारा अक्टूबर में 0.25% ब्याज दर बढ़ाने की 66% संभावना एक जोखिम बनी हुई है।
ब्याज दरें बढ़ने से ग्लोबल कैपिटल उभरते बाजारों से हटकर अमेरिकी बॉन्ड्स की ओर रुख कर सकती है, जिससे FII फ्लो पर दबाव पड़ सकता है। साथ ही, Brent crude का $100 प्रति बैरल के ऊपर रहना भारत के लिए महंगाई और रुपये की कमजोरी का बड़ा कारण है। फिलहाल मार्केट में टेक ग्रोथ और मैक्रो-इकोनॉमिक चुनौतियों के बीच 'टग-ऑफ-वार' चल रही है।
