AI का नाम बदलकर अब 'Super Intelligence', US सरकार के फैसले पर भड़के दिग्गज

TECHNOLOGY
Whalesbook Logo
AuthorSaanvi Reddy|Published at:
AI का नाम बदलकर अब 'Super Intelligence', US सरकार के फैसले पर भड़के दिग्गज

US प्रशासन ने 'Artificial Intelligence' की जगह अब 'Super Intelligence' शब्द का इस्तेमाल शुरू कर दिया है। ट्रंप सरकार ने इसके लिए एक नई फोर्स बनाई है, हालांकि AI एक्सपर्ट Geoffrey Hinton ने इसे लेकर सुरक्षा संबंधी गंभीर चिंताएं जताई हैं।

नई नीति और 'Super Intelligence Force'

ट्रंप प्रशासन ने अपनी आधिकारिक तकनीक नीति में बड़ा बदलाव किया है। अब सरकारी दस्तावेजों में 'Artificial Intelligence' की जगह 'Super Intelligence' शब्द का उपयोग अनिवार्य कर दिया गया है। इसके साथ ही, नेशनल इंटेलिजेंस के डायरेक्टर Jay Clayton की अध्यक्षता में एक 'Super Intelligence Force' का गठन किया गया है। इसका मुख्य मकसद वैश्विक टेक्नोलॉजी रेस में, खासकर चीन के मुकाबले, अमेरिका को लीडर बनाना है।

क्यों विरोध कर रहे हैं Geoffrey Hinton?

आधुनिक AI के जनक माने जाने वाले Geoffrey Hinton ने इस नई दिशा पर सवाल खड़े किए हैं। उनका तर्क है कि नाम बदलने से सिस्टम की कार्यप्रणाली के प्रति सरकार की समझ अधूरी झलकती है। हिंटन के अनुसार, वर्तमान मशीन लर्निंग और भविष्य की काल्पनिक प्रणालियों को एक साथ जोड़कर पेश करने से आम जनता गुमराह हो सकती है और मौजूदा तकनीकों से जुड़े असली जोखिमों को नजरअंदाज किया जा सकता है।

निवेशकों के लिए क्या हैं संकेत?

बाजार के नजरिए से सबसे बड़ा बदलाव रेगुलेटरी रुख में आया है। व्हाइट हाउस अब सख्त और अनिवार्य कानूनों के बजाय बड़ी टेक कंपनियों के साथ 'स्वैच्छिक सुरक्षा समझौतों' (Voluntary Safety Commitments) पर जोर दे रहा है। इससे कंपनियों पर कंप्लायंस का बोझ तो घटेगा और इनोवेशन की रफ्तार तेज होगी, लेकिन लंबी अवधि के लिए कानूनी और नैतिक मानकों में अनिश्चितता बढ़ सकती है।

भारतीय IT सेक्टर पर असर

वैश्विक स्तर पर अब रेगुलेटरी फ्रेमवर्क दो हिस्सों में बंटता दिख रहा है: एक तरफ अमेरिका का स्वैच्छिक रास्ता है और दूसरी तरफ अन्य देशों के कड़े अनिवार्य नियम। भारतीय IT कंपनियां जो US टेक फर्मों के साथ काम करती हैं, उन्हें अब इन बदलते मानकों के हिसाब से अपने इंटरनल प्रोटोकॉल को ढालना होगा। अगर कंपनियां केवल रफ्तार को प्राथमिकता देती हैं, तो सिस्टम फेलियर, डेटा प्राइवेसी और एथिकल विवादों का जोखिम बढ़ सकता है। निवेशकों को सलाह है कि वे टेक दिग्गज कंपनियों के इंटरनल सेफ्टी ऑडिट्स पर बारीकी से नजर रखें, क्योंकि सुरक्षा बनाम रफ्तार की यह जंग आने वाले समय में बाजार की चाल तय करेगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.