US Department of Homeland Security ने H-1B वीजा फीस को बढ़ाकर **$103,265** करने का प्रस्ताव दिया है। इस खबर ने भारतीय IT कंपनियों के लिए अनिश्चितता बढ़ा दी है, क्योंकि इससे कंपनियों के टैलेंट मैनेजमेंट और मार्जिन पर दबाव पड़ सकता है।
अमेरिकी सरकार (DHS) का यह प्रस्ताव अगस्त 2026 के अंत में सामने आया है, जो अभी 30 दिन की पब्लिक कमेंट अवधि में है। यह कदम फेडरल एडमिनिस्ट्रेटिव खर्चों को वसूलने के इरादे से उठाया गया है, लेकिन भारतीय IT सेक्टर के लिए यह चिंता का विषय बन गया है।
IT कंपनियों पर असर
भारतीय IT कंपनियां जैसे TCS, Infosys, HCLTech, Wipro और Tech Mahindra दशकों से अमेरिकी क्लाइंट्स के लिए H-1B वीजा का इस्तेमाल करती आई हैं। हालांकि, बीते 10 सालों में इन कंपनियों ने अपना बिजनेस मॉडल काफी बदल लिया है। अब ये कंपनियां अमेरिका में स्थानीय भर्तियां (Local Hiring) बढ़ा रही हैं और काम को भारत में शिफ्ट (Offshore) करने पर जोर दे रही हैं। यदि यह $103,265 की फीस कानून बन जाती है, तो कंपनियों को अपनी ऑन-साइट प्रोजेक्ट स्ट्रैटेजी को फिर से सोचना होगा। अगर वे इस लागत को क्लाइंट्स पर नहीं डाल पाती हैं, तो उनके नेट प्रॉफिट मार्जिन पर सीधा असर दिखेगा।
कानूनी अनिश्चितता और निवेशकों के लिए राह
यह ध्यान रखना जरूरी है कि अभी यह सिर्फ एक प्रपोजल है, कानून नहीं। साल 2026 की शुरुआत में भी एक जज ने $100,000 की फीस को अवैध टैक्स बताकर ब्लॉक कर दिया था। इस बार भी इस पर लंबी कानूनी लड़ाई तय है। निवेशकों के लिए फिलहाल सबसे बड़ा जोखिम 'अनिश्चितता' है। आपको कंपनियों के आगामी तिमाही नतीजों में मैनेजमेंट की कमेंट्री पर नजर रखनी चाहिए कि वे कैसे अपने वर्कफोर्स को भविष्य के लिए तैयार कर रहे हैं और क्लाइंट कॉन्ट्रैक्ट्स को लेकर उनकी क्या रणनीति है।
