U.S. Department of Defense ने अपने सभी सरकारी डिवाइस पर एडवरटाइजिंग ट्रैकिंग को पूरी तरह ब्लॉक कर दिया है। इसका मुख्य उद्देश्य अपने कर्मियों को विदेशी खुफिया ताकतों द्वारा लोकेशन डेटा के जरिए ट्रैक होने से बचाना है, जो साइबर सिक्योरिटी सेक्टर के लिए एक बड़ा कदम है।
सुरक्षा के लिए कड़े कदम
U.S. Department of Defense ने नेशनल सिक्योरिटी को मजबूत करने के लिए अपने सरकारी मोबाइल और कंप्यूटर डिवाइस से एडवरटाइजिंग ट्रैकिंग फीचर्स को डिसेबल कर दिया है। यह पॉलिसी Army, Air Force, Navy और Marine Corps की सभी शाखाओं पर लागू की गई है। इसका मकसद उस डिजिटल भेद्यता को खत्म करना है, जिसका फायदा उठाकर दुश्मन देश अमेरिकी सैन्य कर्मियों की गतिविधियों पर नजर रख रहे थे।
कमर्शियल डेटा से बढ़ता खतरा
यह फैसला तब लिया गया जब इस बात की चिंता बढ़ गई कि दुश्मन देश कमर्शियल डेटा ब्रोकर्स से सैन्य कर्मियों का लोकेशन डेटा खरीद रहे हैं। मिडिल ईस्ट जैसे कॉन्फ्लिक्ट जोन में मोबाइल ऐप्स के जरिए मिलने वाले डिजिटल सिग्नेचर सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा बने हुए थे। एडवरटाइजिंग आइडेंटिफायर्स को निष्क्रिय करके, अब यह डिवाइस ऐसी सटीक जानकारी नहीं भेज पाएंगे, जिसका इस्तेमाल कर्मियों के खिलाफ किया जा सके।
निगरानी के नए चैलेंज
हालांकि, यह कदम सरकारी नेटवर्क के लिए तो कारगर है, लेकिन पर्सनल डिवाइस अब भी एक बड़ा खतरा बने हुए हैं। सीनेटर Ron Wyden जैसे कानूनविदों ने चेतावनी दी है कि जो पर्सनल मोबाइल फोन सैनिक या कॉन्ट्रैक्टर्स मिलिट्री बेस के अंदर ले जाते हैं, उन पर यह नियम लागू नहीं होता। वहां से अभी भी लोकेशन डेटा लीक होने का बड़ा रिस्क बना हुआ है, जो डेटा के कमोडिटी बन जाने के दौर में सुरक्षा चुनौतियों को उजागर करता है।
टेक इंडस्ट्री और निवेशकों के लिए संकेत
इन्वेस्टर्स और मार्केट जानकारों के लिए यह एक संकेत है कि डेटा ब्रोकरेज इंडस्ट्री पर अब सख्त शिकंजा कसने वाला है। जैसे-जैसे सरकारें डेटा प्राइवेसी को नेशनल सिक्योरिटी से जोड़ रही हैं, उन कंपनियों के रेवेन्यू मॉडल पर दबाव बढ़ना तय है जो लोकेशन डेटा के कलेक्शन और सेल पर निर्भर हैं। आने वाले समय में साइबर सिक्योरिटी सेक्टर के लिए कंप्लायंस के नियम और भी सख्त हो सकते हैं, जिसका असर विज्ञापन जगत की पुरानी कार्यप्रणाली पर पड़ सकता है।
