12 अगस्त 2026 को अमेरिकी शेयर बाजारों में तेजी देखी गई। AI कंपनियों के मजबूत नतीजों और महंगाई के नरम आंकड़ों ने ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आशंकाओं को कम कर दिया। S&P 500 और Nasdaq में उछाल आया, जबकि Dow मामूली गिरा।
AI कंपनियों के नतीजों ने जगाई उम्मीदें
12 अगस्त 2026, बुधवार को अमेरिकी बाजारों में नई उम्मीदें जगीं। निवेशकों का ध्यान AI से जुड़ी कंपनियों के शानदार नतीजों और महंगाई के आंकड़ों पर टिका रहा। S&P 500 इंडेक्स 0.26% चढ़कर 7,748.50 पर बंद हुआ, वहीं Nasdaq Composite 0.54% की बढ़त के साथ 26,588.49 पर पहुँच गया। Dow Jones Industrial Average हालांकि 0.04% की मामूली गिरावट के साथ 53,770.27 पर रहा।
AI शेयरों में तूफानी तेजी
निवेशकों की नजरें AI इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियों पर टिकी रहीं। CoreWeave और Super Micro Computer, दोनों के शेयर नतीजों के बाद लगभग 19% तक चढ़ गए। यह ट्रेंड दिखाता है कि आर्थिक चिंताओं के बावजूद, AI से जुड़े हार्डवेयर और क्लाउड सेवाओं की मांग बाजार की चाल को आगे बढ़ा रही है, जिससे टेक इंडेक्स में तेजी आ रही है।
महंगाई पर नरमी, रेट हाइक का डर कम
जुलाई के लिए जारी महंगाई के आंकड़ों में सालाना आधार पर 3.4% की बढ़ोतरी हुई, जो बाजार की उम्मीदों के अनुरूप है। महंगाई के स्थिर रहने से निवेशकों को भरोसा है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व सितंबर की अपनी मीटिंग में ब्याज दरों को अपरिवर्तित रखेगा। केंद्रीय बैंक द्वारा दरों को स्थिर रखने की संभावना अब लगभग 62% आंकी जा रही है, जिससे उन बाजारों को राहत मिली है जो पहले संभावित रेट हाइक पर चर्चा कर रहे थे।
आगे क्या?
टेक्नोलॉजी शेयरों ने भले ही बढ़त दिलाई हो, लेकिन निवेशक सतर्क हैं। कई AI कंपनियों के मौजूदा वैल्यूएशन की स्थिरता को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं। इसके अलावा, भू-राजनीतिक जोखिम जैसे संभावित ऊर्जा आपूर्ति में रुकावटों पर भी नजर रखी जा रही है, जो महंगाई को उम्मीद से ज्यादा बढ़ा सकते हैं। Cboe Volatility Index, जिसे मार्केट का डर मापा जाता है, 14.45 पर आ गया, जो जनवरी के बाद का सबसे निचला स्तर है। यह हाल की बाजार की चिंताओं में आई कमी को दर्शाता है।
अब बाजार की नजरें आने वाली आर्थिक रिपोर्टों, खासकर Producer Price Index पर होंगी, ताकि फेड के सितंबर फैसले से पहले महंगाई की असली दिशा का अंदाजा लगाया जा सके। वैश्विक निवेशकों के लिए, ये अमेरिकी रुझान अक्सर व्यापक भावना के बैरोमीटर के रूप में कार्य करते हैं, जो भारत सहित अंतरराष्ट्रीय बाजारों में पूंजी प्रवाह को प्रभावित करते हैं।
