US की संघीय एजेंसियों ने औद्योगिक रेफ्रिजरेशन सिस्टम पर हो रहे साइबर हमलों को लेकर अलर्ट जारी किया है। हैकर्स इंटरनेट से जुड़े इन सिस्टम्स का तापमान बदलकर माल खराब कर रहे हैं, जो वैश्विक सप्लाई चेन के लिए बड़ा खतरा है।
US की साइबर सुरक्षा एजेंसी CISA और FBI ने एक संयुक्त एडवाइजरी जारी कर चेतावनी दी है कि इंटरनेट से जुड़े औद्योगिक रेफ्रिजरेशन और कोल्ड-स्टोरेज यूनिट्स पर साइबर हमलों का खतरा बढ़ गया है। ये हमले न केवल रिटेल सुपरमार्केट, बल्कि मिलिट्री कमिसरी और मेडिकल सेंटर्स के लिए भी बड़ी मुसीबत बन गए हैं।
क्या है समस्या का मुख्य कारण?
समस्या की जड़ पुराने रिमोट-कंट्रोल रेफ्रिजरेशन कंट्रोलर्स हैं, जिनमें Danfoss, Copeland और Dixell जैसी कंपनियों के मॉडल्स शामिल हैं। ये यूनिट्स रिमोट मॉनिटरिंग के लिए इंटरनेट से तो जुड़े हैं, लेकिन इनमें आधुनिक सिक्योरिटी पैच या नेटवर्क प्रोटेक्शन का अभाव है। इसका फायदा उठाकर हैकर्स सिस्टम में घुसकर तापमान सेटिंग के साथ छेड़छाड़ कर रहे हैं। हैकर्स जानबूझकर यूनिट्स को लंबे समय तक हीटिंग या डीफ्रॉस्ट मोड पर डाल देते हैं, जिससे सामान खराब हो जाता है, हार्डवेयर को नुकसान पहुँचता है और आग लगने का जोखिम भी पैदा होता है।
निवेशकों के लिए सबक
फार्मास्युटिकल, फूड प्रोसेसिंग और रिटेल जैसे सेक्टर कोल्ड चेन लॉजिस्टिक्स पर बहुत अधिक निर्भर हैं। यदि इन कंपनियों का डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर सुरक्षित नहीं है, तो उन्हें भारी वित्तीय नुकसान झेलना पड़ सकता है। इसमें केवल सामान खराब होने का ही नहीं, बल्कि महंगे उपकरणों की मरम्मत और परिचालन बाधित होने का भी जोखिम शामिल है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अब कंपनियों के लिए फाइनेंशियल डेटा के साथ-साथ अपने ऑपरेशनल टेक्नोलॉजी (OT) को सुरक्षित रखना भी उतना ही जरूरी हो गया है। निवेशकों को यह ट्रैक करना चाहिए कि क्या ये कंपनियां साइबर सुरक्षा ऑडिट और मॉडर्न इक्विपमेंट पर सही निवेश कर रही हैं या नहीं। फिलहाल, अधिकारियों ने इन सिस्टम्स को पब्लिक इंटरनेट से तुरंत हटाने और सख्त पासवर्ड प्रोटोकॉल अपनाने की सलाह दी है।
