US-India Science & Technology Endowment Fund (USISTEF) ने नई ग्रांट विंडो खोली है। अब क्वांटम टेक्नोलॉजी और क्रिटिकल मिनरल के क्षेत्र में काम करने वाली कंपनियां **₹1.5 करोड़** तक की आर्थिक सहायता पा सकती हैं।
क्या है यह पहल?
US-India Science & Technology Endowment Fund (USISTEF) ने अपने नए प्रपोजल्स के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं। इस पहल के जरिए हर प्रोजेक्ट को ₹1.5 करोड़ तक की फंडिंग मिल सकती है, जिसका मुख्य मकसद रिसर्च और डेवलपमेंट (R&D) में भारत-अमेरिका के बीच सहयोग को बढ़ावा देना है। इस पूरे प्रोजेक्ट का समयकाल 24 महीने तक रखा गया है।
क्यों है यह सेक्टर महत्वपूर्ण?
क्वांटम टेक्नोलॉजी और क्रिटिकल मिनरल का चुनाव रणनीतिक रूप से बहुत अहम है। क्रिटिकल मिनरल का मुद्दा आज ग्लोबल सप्लाई चेन के लिए सबसे बड़ा चैलेंज है, जिसका सीधा असर क्लीन एनर्जी, इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) और सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग जैसे सेक्टर्स पर पड़ता है। वहीं, क्वांटम टेक्नोलॉजी के जरिए डेटा प्रोसेसिंग और सुरक्षित कम्युनिकेशन में बड़े बदलाव की उम्मीद है।
पात्रता और शर्तें
फंडिंग पाने के लिए यह जरूरी है कि प्रोजेक्ट में कम से कम एक भारतीय और एक अमेरिकी संस्था शामिल हो। इसके अलावा, फंड का यह नियम है कि इसमें एक एंटरप्रेन्योरियल कॉम्पोनेंट (जैसे SME) जरूर हो, ताकि तकनीक केवल लैब तक सीमित न रहे बल्कि कमर्शियल लेवल पर सफल हो सके।
निवेशकों के लिए चेतावनी
हालांकि यह पैसा बिना किसी इक्विटी डाइल्यूशन के मिल रहा है, लेकिन निवेशकों को इन प्रोजेक्ट्स की लंबी टाइमलाइन और कमर्शियल वायबिलिटी के रिस्क को समझना होगा। क्वांटम और एडवांस मटेरियल साइंस जैसे जटिल प्रोजेक्ट्स में मास-मार्केट स्केलेबिलिटी हासिल करना हमेशा से एक बड़ी चुनौती रही है। हाल ही में इस ग्रांट के लिए आवेदन की आखिरी तारीख 31 अगस्त, 2026 थी, और अब बाजार की नजरें इस बात पर हैं कि किन चुनिंदा प्रोजेक्ट्स को यह फंड मिलता है, क्योंकि ये नतीजे भविष्य के टेक्नोलॉजी ट्रेंड्स के संकेत हो सकते हैं।
