H-1B Visa Fee: अमेरिकी सरकार का बड़ा झटका, IT कंपनियों के लिए बढ़ी मुश्किलें

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
H-1B Visa Fee: अमेरिकी सरकार का बड़ा झटका, IT कंपनियों के लिए बढ़ी मुश्किलें

अमेरिका ने H-1B वीजा पर **$100,000** की भारी-भरकम फीस को अगले एक साल के लिए और बढ़ा दिया है। इस नए नियम के तहत उन कंपनियों पर कड़ी नजर रखी जाएगी जिन्होंने हाल ही में अमेरिकी कर्मचारियों को निकाला है। यह फैसला भारतीय IT कंपनियों के लिए बड़ा सिरदर्द बन सकता है।

वीजा फीस और सख्ती का दोहरा वार

अमेरिका के इस कदम से विदेशी कर्मचारियों पर निर्भरता कम करने की कोशिश साफ दिख रही है। आधिकारिक डेटा के अनुसार, पिछले साल इस फीस के लागू होने के बाद से बड़ी आउटसोर्सिंग कंपनियों के H-1B रजिस्ट्रेशन में 92% की गिरावट आई है।

ले-ऑफ (Layoff) पर अब सरकार की पैनी नजर

नई पॉलिसी सिर्फ महंगी फीस तक सीमित नहीं है। अब अमेरिका के सेक्रेटरी ऑफ स्टेट, लेबर और होमलैंड सिक्योरिटी को उन कंपनियों के पुराने रिकॉर्ड को खंगालने का निर्देश दिया गया है, जो नए वीजा के लिए अप्लाई कर रही हैं। अगर किसी कंपनी ने हाल ही में अमेरिकी कर्मचारियों को निकाला है, तो उनके वीजा एप्लिकेशन के रिजेक्ट होने की संभावना बहुत ज्यादा बढ़ जाएगी। सरकार का मकसद साफ है—कंपनियों को सस्ते विदेशी लेबर से स्थानीय कर्मचारियों को रिप्लेस करने से रोकना।

भारतीय IT सेक्टर पर असर

Tata Consultancy Services, Infosys, Wipro, HCL Technologies और Tech Mahindra जैसी दिग्गज कंपनियां अपनी अमेरिकी क्लाइंट्स को सर्विस देने के लिए H-1B वीजा पर काफी निर्भर हैं। इस बदलाव से कंपनियों पर दोतरफा मार पड़ेगी: पहली, वीजा की सीधी लागत और दूसरी, अमेरिका में स्थानीय स्तर पर हायरिंग करने का खर्च, जो कि वहां काफी महंगा है।

निवेशकों के लिए क्या है संकेत?

मामला यहीं खत्म नहीं होता। इस फीस के खिलाफ अमेरिका की दो फेडरल कोर्ट्स में कानूनी लड़ाई भी चल रही है, जिससे अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है। हालांकि, स्टूडेंट्स और वीजा रिन्यूअल कराने वालों के लिए फिलहाल राहत है, लेकिन भारतीय IT सेक्टर के लिए मार्जिन पर दबाव बढ़ सकता है। निवेशकों को अब इन कंपनियों के मैनेजमेंट कमेंट्री पर नजर रखनी चाहिए कि वे कैसे इस बढ़ती लागत को क्लाइंट्स पर ट्रांसफर करती हैं या अपने ऑपरेशनल मॉडल में क्या बदलाव लाती हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.