अमेरिकी अदालत ने Google की पैरेंट कंपनी Alphabet को अपना एड एक्सचेंज (AdX) यूनिट बेचने के दबाव से राहत दी है। कोर्ट ने कंपनी को तोड़ने के बजाय कुछ 'बिहेवियरल रेमेडीज' (behavioral remedies) लागू करने का आदेश दिया है, जिसके बाद शेयर में **1%** की तेजी देखी गई।
कोर्ट का बड़ा फैसला और निवेशकों को राहत
वर्जीनिया की एक संघीय अदालत ने सरकार के उस प्रस्ताव को खारिज कर दिया है जिसमें Alphabet को अपनी AdX एडवरटाइजिंग एक्सचेंज यूनिट को बेचने के लिए मजबूर करने की मांग की गई थी। अमेरिकी न्याय विभाग (Department of Justice) का तर्क था कि कंपनी ने एड-टेक मार्केट में अवैध मोनोपॉली (monopoly) बना रखी है। इस जीत के बाद Alphabet के शेयरों में 1% का इजाफा हुआ, क्योंकि कंपनी का इंटीग्रेटेड विज्ञापन ढांचा सुरक्षित रहा।
अब आगे क्या होगा?
यद्यपि कंपनी को तोड़ने का खतरा टल गया है, लेकिन कोर्ट ने Alphabet को 'बिहेवियरल रेमेडीज' के तहत काम करने का निर्देश दिया है। हालांकि इन नियमों की विस्तृत जानकारी अभी गुप्त रखी गई है, लेकिन माना जा रहा है कि इसमें ऑक्शन (auction) लॉजिक और सेवाओं के एकीकरण में बदलाव शामिल हो सकते हैं। निवेशकों को अब इस बात पर नजर रखनी होगी कि ये नए नियम कंपनी के प्रॉफिट मार्जिन को भविष्य में कितना प्रभावित करते हैं।
अभी भी बना हुआ है कानूनी दबाव
यह फैसला निश्चित रूप से एक बड़ी राहत है, लेकिन कंपनी पर रेगुलेटरी दबाव अभी खत्म नहीं हुआ है। साल 2025 में Google को पब्लिशर एड सर्वर मार्केट में मोनोपॉली का दोषी पाया गया था, जिसके चलते कंपनी अभी भी कानूनी निगरानी में है। दुनिया भर की सरकारों, जिनमें भारत भी शामिल है, की नजर Google की व्यावसायिक प्रथाओं पर बनी हुई है और आने वाले समय में अन्य कानूनी लड़ाइयां कंपनी के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकती हैं।
