UPI का जलवा! जुलाई 2026 में 23.66 अरब से ज़्यादा ट्रांजैक्शन, ₹30 लाख करोड़ का आंकड़ा पार

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
UPI का जलवा! जुलाई 2026 में 23.66 अरब से ज़्यादा ट्रांजैक्शन, ₹30 लाख करोड़ का आंकड़ा पार

भारत का यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) जुलाई 2026 में एक नया रिकॉर्ड बनाने में कामयाब रहा। इस महीने कुल **23.66 अरब** से ज़्यादा ट्रांजैक्शन हुए, जिनकी कुल वैल्यू लगभग **₹30 लाख करोड़** रही। यह पिछले साल के मुकाबले वॉल्यूम में **22%** की बढ़ोतरी दर्शाता है, जिसका मुख्य कारण छोटे शहरों में बढ़ती डिजिटल पेमेंट की आदतें और रोज़मर्रा के छोटे-मोटे भुगतानों का डिजिटल होना है।

UPI ने रचा इतिहास!

नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) के ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक, जुलाई 2026 में UPI ने एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। इस महीने प्लेटफॉर्म पर कुल 23.66 अरब (बिलियन) ट्रांजैक्शन हुए, वहीं ट्रांजैक्शन की कुल वैल्यू ₹30 लाख करोड़ के करीब पहुंच गई।

यह दिखाता है कि भारत में डिजिटल भुगतान का चलन लगातार बढ़ रहा है। जुलाई 2025 की तुलना में, इस बार ट्रांजैक्शन की संख्या में 22% का ज़बरदस्त उछाल आया, जबकि कुल वैल्यू 19% बढ़ी। रोज़ाना के हिसाब से देखें तो, UPI ने औसतन 76.3 करोड़ (763 मिलियन) ट्रांजैक्शन को प्रोसेस किया, जिनकी रोज़ाना की वैल्यू करीब ₹96,383 करोड़ रही। जून 2026 में 22.72 अरब ट्रांजैक्शन और ₹28.92 लाख करोड़ की वैल्यू दर्ज की गई थी, और यह नया आंकड़ा दर्शाता है कि UPI की ग्रोथ अभी भी थमी नहीं है।

छोटे शहरों में बढ़ी डिजिटल क्रांति

जुलाई के आंकड़ों की सबसे खास बात यह है कि ग्रोथ सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित नहीं है। UPI अब टियर-2, टियर-3 शहरों और ग्रामीण इलाकों में भी अपनी पैठ बना रहा है। बिजली बिल भरने से लेकर छोटी-मोटी खरीदारी तक, रोज़मर्रा के छोटे खर्चे अब कैश की जगह डिजिटल प्लेटफॉर्म पर हो रहे हैं।

एक्सपर्ट्स का मानना है कि ट्रांजैक्शन की संख्या (वॉल्यूम) का वैल्यू से ज़्यादा तेज़ी से बढ़ना यह बताता है कि लोग अब छोटे और बार-बार होने वाले पेमेंट्स के लिए UPI का इस्तेमाल कर रहे हैं। यह धीरे-धीरे ग्राहकों और छोटे व्यापारियों के लिए पहला पेमेंट विकल्प बनता जा रहा है, जो पहले पूरी तरह कैश पर निर्भर थे।

'ऑर्गेनिक' ग्रोथ और भविष्य की संभावनाएं

यह परफॉरमेंस इसलिए भी अहम है क्योंकि यह ऐसे समय में आई जब कोई बड़ा फेस्टिव सीजन या तिमाही के अंत का भारी कारोबारी सत्र नहीं था। इससे यह साबित होता है कि यह ग्रोथ असल में लोगों के बदलते व्यवहार की वजह से 'ऑर्गेनिक' है, न कि किसी बाहरी फैक्टर का नतीजा।

आगे चलकर, फिनटेक सेक्टर 'क्रेडिट ऑन UPI' जैसी नई सुविधाओं पर काम कर रहा है, जिससे UPI का इस्तेमाल और बढ़ सकता है। 'क्रेडिट ऑन UPI' के ज़रिए शॉर्ट-टर्म क्रेडिट को सीधे UPI पेमेंट सिस्टम में जोड़ा जाएगा। जैसे-जैसे भारतीय अर्थव्यवस्था त्योहारी सीजन की ओर बढ़ेगी, यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या ग्रोथ की यह रफ्तार और तेज़ होती है और ये नई क्रेडिट-आधारित सुविधाएं आने वाले महीनों में कुल ट्रांजैक्शन वैल्यू को कैसे प्रभावित करती हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.