उत्तर प्रदेश में हो रहे UP-Japan Investment Meet 2026 के बीच, Escorts Kubota और Minda Corporation जैसी बड़ी कंपनियों ने ₹3,191 करोड़ के कुल निवेश का ऐलान किया है। इस पैसे से YEIDA रीजन में मैन्युफैक्चरिंग कैपेसिटी बढ़ाई जाएगी, जो राज्य के $1 ट्रिलियन इकोनॉमी के लक्ष्य को पूरा करने में मदद करेगा।
जापान के साथ UP की आर्थिक दोस्ती!
उत्तर प्रदेश जापान के साथ अपने आर्थिक संबंधों को मजबूत करने में जुटा है। इसी कड़ी में, 18 से 23 अगस्त तक 'UP-Japan Investment Meet 2026' का आयोजन किया जा रहा है। राज्य सरकार इस मंच का इस्तेमाल सेमीकंडक्टर, डेटा सेंटर और एडवांस इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे अहम सेक्टरों में विदेशी निवेश लाने के लिए कर रही है। यह सब राज्य को $1 ट्रिलियन की इकोनॉमी बनाने के बड़े प्लान का हिस्सा है।
कंपनियां कर रहीं बड़ा निवेश
इस पहल के तहत, दो बड़ी मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों ने Yamuna Expressway Industrial Development Authority (YEIDA) रीजन में भारी-भरकम निवेश करने का वादा किया है।
- Escorts Kubota करीब ₹2,025 करोड़ का निवेश करेगी। कंपनी एक ऐसी फैसिलिटी लगाएगी जहाँ सालाना 60,000 ट्रैक्टर और 15,000 कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट यूनिट्स का प्रोडक्शन होगा।
- वहीं, Minda Corporation ने ₹1,166 करोड़ के दो अलग-अलग प्रोजेक्ट्स का ऐलान किया है। कंपनी को उम्मीद है कि इससे 6,400 से ज्यादा नई नौकरियां पैदा होंगी।
'जापान सिटी' और इंडस्ट्रियल पॉलिसी
राज्य सरकार अपनी इंडस्ट्रियल लैंड बैंक स्ट्रैटेजी के तहत एक खास 'जापान सिटी' डेवलप कर रही है। इस लैंड बैंक में फिलहाल 75,000 एकड़ से ज्यादा जमीन है। 36 अलग-अलग सेक्टर पॉलिसीज का फायदा उठाकर, सरकार एक ऐसा मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम बनाना चाहती है, जहाँ जापानी इंडस्ट्रियल स्टैंडर्ड्स (जैसे Kaizen, 5S, और लीन मैन्युफैक्चरिंग) को राज्य की मौजूदा वर्कफोर्स के साथ जोड़ा जा सके। यह कदम मोबाइल फोन प्रोडक्शन और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग में राज्य की बढ़ती हिस्सेदारी को और मजबूत करेगा।
इंफ्रास्ट्रक्चर का भी मिलेगा फायदा
इसके अलावा, राज्य सरकार जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट और डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर्स जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट का फायदा उठाकर और ग्लोबल मैन्युफैक्चरर्स को आकर्षित करने की कोशिश में है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, राज्य का ग्रॉस स्टेट डोमेस्टिक प्रोडक्ट (GSDP) हाल के सालों में काफी बढ़ा है, जो 2024-25 में अनुमानित ₹30.8 लाख करोड़ तक पहुंच गया है। अब राज्य खुद को ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी मैन्युफैक्चरिंग के एक अहम हब के रूप में पेश कर रहा है।
निवेशकों के लिए ध्यान देने योग्य बातें
हालांकि, इंडस्ट्रियल एक्सपेंशन के लिए यह कमिटमेंट काफी अहम है, लेकिन निवेशकों को यह देखना होगा कि असल में पैसा कब और कितनी तेजी से लगाया जाता है और प्रोजेक्ट्स कब तक शुरू होते हैं। बड़े इंडस्ट्रियल प्रोजेक्ट्स में अक्सर जमीन अधिग्रहण में देरी, रेगुलेटरी क्लीयरेंस मिलने में परेशानी और ग्लोबल इकोनॉमिक अनिश्चितताओं जैसे जोखिम होते हैं। इन प्रोजेक्ट्स की सफल एग्जीक्यूशन राज्य सरकार की समय पर इंफ्रास्ट्रक्चर सपोर्ट देने की क्षमता और कंपनियों की प्लान के मुताबिक अपने ऑपरेशन्स को स्केल करने की काबिलियत पर निर्भर करेगी। आने वाली तिमाहियों में यह देखना अहम होगा कि 36 सेक्टर पॉलिसीज इन नई यूनिट्स के लिए ऑपरेशनल बाधाओं को कितनी प्रभावी ढंग से कम कर पाती हैं।
