यूके के कॉम्पिटिशन एंड मार्केट्स अथॉरिटी (CMA) ने Alphabet के खिलाफ नए नियम प्रस्तावित किए हैं। इसके तहत Google को अपने Android और Chrome प्लेटफॉर्म पर प्रतिद्वंद्वी AI असिस्टेंट्स को जगह देनी होगी।
बाजार पर पकड़ ढीली करने की तैयारी
यूके के रेगुलेटर CMA का मानना है कि Android और Chrome पर Google का 'डिफ़ॉल्ट' स्टेटस मार्केट में प्रतिस्पर्धा को रोकता है। नए ड्राफ्ट नियमों के अनुसार, Google को अब अपने 'चॉइस स्क्रीन' पर ChatGPT और Perplexity जैसे प्रतिद्वंद्वी AI टूल्स को शामिल करना होगा। इसके अलावा, कंपनी को सालाना अपने यूजर्स को सर्च इंजन और AI असिस्टेंट की सेटिंग्स को फिर से चुनने का विकल्प देना होगा, ताकि वे केवल Google के टूल्स पर निर्भर न रहें।
कंटेंट क्रिएटर्स को मिलेगा फायदा
इस नियम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा कंटेंट पब्लिशर्स के लिए है। रेगुलेटर चाहता है कि सर्च प्रोवाइडर्स पब्लिशर्स को कंटेंट का क्रेडिट और फेयर एट्रिब्यूशन दें। वर्तमान में, AI द्वारा जनरेटेड सर्च समरी से वेबसाइट्स का ट्रैफिक कम हो रहा है, जिससे मीडिया जगत का रेवेन्यू प्रभावित हो रहा है।
निवेशकों के लिए जोखिम
Alphabet का पूरा बिजनेस मॉडल यूजर ट्रैफिक को अपने प्लेटफॉर्म पर लाने और उससे विज्ञापन (Advertising) से कमाई करने पर टिका है। यदि यूजर्स अपने डिफ़ॉल्ट सर्च विकल्प बदलते हैं, तो कंपनी के इंगेजमेंट मेट्रिक्स और एड रेवेन्यू में 1% से 5% तक का नकारात्मक असर दिख सकता है।
ग्लोबल रेगुलेशन का दबाव
यूके की यह सख्ती केवल एक शुरुआत हो सकती है। अमेरिका और यूरोपियन यूनियन भी इसी तरह के एंटी-ट्रस्ट नियमों पर विचार कर रहे हैं। 9 अक्टूबर 2026 तक इन प्रस्तावों पर जनता से राय मांगी गई है और साल के अंत तक फाइनल फ्रेमवर्क तैयार होने की उम्मीद है। निवेशकों को अब इस पर नजर रखनी चाहिए कि क्या Alphabet कानूनी रास्ता अपनाता है या रेगुलेटरी बदलावों को स्वीकार करता है।
