UK के कॉम्पिटिशन एंड मार्केट्स अथॉरिटी (CMA) ने Apple के पेमेंट सिस्टम पर लगाम लगाने के लिए नए नियम प्रस्तावित किए हैं। इसका मकसद Apple डिवाइस पर थर्ड-पार्टी ऐप्स के लिए रुकावटें कम करना और फिनटेक कॉम्पिटिशन को बढ़ावा देना है।
ब्रिटेन के कॉम्पिटिशन एंड मार्केट्स अथॉरिटी (CMA) ने iPhones के कॉन्टैक्टलेस पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर पर Apple की पकड़ को कम करने के लिए एक सख्त रुख अपनाया है। रेगुलेटर का तर्क है कि मौजूदा सिस्टम, जो थर्ड-पार्टी पेमेंट ऐप्स को डिवाइस के NFC (नियर फील्ड कम्युनिकेशन) चिप के साथ जुड़ने से रोकता है, वह एंटी-कॉम्पिटिटिव बाधाएं पैदा करता है। इस प्रस्ताव के जरिए CMA का लक्ष्य एक्सेस फीस को कम करना और डिजिटल बैंकों तथा स्थानीय फिनटेक कंपनियों के लिए टेक्नोलॉजी का रास्ता आसान बनाना है।
निवेशकों के लिए चिंता
इन्वेस्टर्स की सबसे बड़ी चिंता Apple के 'सर्विसेज' बिजनेस सेगमेंट को लेकर है। कंपनी का यह हिस्सा, जिसमें ऐप स्टोर फीस, डिजिटल वॉलेट और क्लाउड स्टोरेज शामिल हैं, मुनाफे का एक बड़ा जरिया है। अगर Apple को अपना प्लेटफॉर्म और ज्यादा खोलना पड़ा या फीस घटाने पर मजबूर होना पड़ा, तो कंपनी के इस रेवेन्यू स्ट्रीम पर लॉन्ग टर्म में असर पड़ सकता है।
Apple का पक्ष
Apple ने इस प्रस्ताव का विरोध किया है और इसके पीछे सुरक्षा और प्राइवेसी को मुख्य कारण बताया है। कंपनी का कहना है कि NFC चिप और क्रिप्टोग्राफिक कीज़ (keys) पर सख्त नियंत्रण धोखाधड़ी रोकने और यूजर्स का डेटा सुरक्षित रखने के लिए जरूरी है। अब यह चर्चा 17 नवंबर तक जारी रहने वाली कंसल्टेशन पीरियड के दौरान चलती रहेगी।
यह कदम ग्लोबल स्तर पर बड़ी टेक कंपनियों पर बढ़ती रेगुलेटरी सख्ती का हिस्सा है। यूरोपीय संघ (EU) में भी इसी तरह की चुनौतियां सामने आ चुकी हैं। ब्रिटेन में अब 39% पेमेंट कॉन्टैक्टलेस तरीके से होते हैं, ऐसे में यह देखना अहम होगा कि क्या यह रेगुलेटरी दबाव अन्य बड़े ग्लोबल मार्केट्स में भी फैलता है या नहीं।
