Tower Semiconductor, AI और डेटा सेंटर के लिए चिप मैन्युफैक्चरिंग बढ़ाने हेतु जापान में ₹3000 करोड़ (3 बिलियन डॉलर) का निवेश करने जा रहा है। कंपनी को इस प्रोजेक्ट के लिए ₹800 करोड़ (1 बिलियन डॉलर) की सरकारी ग्रांट भी मिलेगी, जिससे सिलिकॉन फोटोनिक्स और सिलिकॉन-जर्मेनियम टेक्नोलॉजी का उत्पादन बढ़ेगा। कंपनी को उम्मीद है कि यह फैसिलिटी 2027 के अंत तक पूरी तरह चालू हो जाएगी, जिसका सीधा असर इसके लॉन्ग-टर्म रेवेन्यू और प्रॉफिट पर पड़ेगा।
AI टेक्नोलॉजी पर खास फोकस
यह निवेश दो खास टेक्नोलॉजी पर केंद्रित है। कंपनी सिलिकॉन फोटोनिक्स का उत्पादन बढ़ाएगी, जो AI प्रोसेसर्स के बीच डेटा ट्रांसफर स्पीड को बेहतर बनाने के लिए लाइट का इस्तेमाल करता है। साथ ही, सिलिकॉन-जर्मेनियम (Silicon-Germanium) का भी उत्पादन बढ़ाया जाएगा, जो चिप्स की स्पीड और एनर्जी एफिशिएंसी को बढ़ाता है। इन स्पेसिफिक सेगमेंट्स को टारगेट करके, Tower Semiconductor हाई-परफॉरमेंस कंप्यूटिंग मार्केट की मांग को पूरा करना चाहता है, जहाँ फिलहाल सप्लाई से ज्यादा डिमांड है।
विस्तार की समय-सीमा और वित्तीय अनुमान
यह विस्तार दो चरणों में पूरा होगा। पहले चरण में, कंपनी अपनी मौजूदा अराई (Arai) फैसिलिटी, जिसे पहले Fab 6 के नाम से जाना जाता था, को सिलिकॉन फोटोनिक्स के 300-मिलीमीटर प्रोडक्शन के लिए मॉडिफाई करेगी। यह फैसिलिटी 2027 की चौथी तिमाही तक पूरी तरह से ऑपरेशनल हो जाएगी। दूसरे चरण में, मौजूदा Fab 7 प्लांट के बगल में एक नई 300mm मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी का निर्माण किया जाएगा।
वित्तीय लिहाज़ से, Tower Semiconductor ने इस विस्तार के साथ बड़े अनुमान लगाए हैं। कंपनी का अनुमान है कि 2028 तक इसका सालाना रेवेन्यू ₹28,800 करोड़ ($3.6 बिलियन) तक पहुंच सकता है, जिसमें नेट प्रॉफिट ₹9,600 करोड़ ($1.2 बिलियन) हो सकता है। यह कंपनी के पिछले अनुमानों से काफी ज़्यादा है, जो ₹22,400 करोड़ ($2.8 बिलियन) रेवेन्यू और ₹6,000 करोड़ ($750 मिलियन) नेट प्रॉफिट का था।
निवेशकों के लिए मुख्य बातें
निवेशकों के लिए, इस कैपिटल-इंटेंसिव विस्तार की सफलता कई फैक्टर्स पर निर्भर करेगी। पहला है एग्जीक्यूशन का रिस्क (Risk of Execution), क्योंकि सेमीकंडक्टर फैसिलिटीज का निर्माण और री-टूलिंग जटिल इंजीनियरिंग और लंबी लीड टाइम का काम है। निवेशक संभवतः 2027 की समय-सीमा को पूरा करने और नई क्षमता को मौजूदा ऑपरेशंस के साथ एकीकृत करने में कंपनी की प्रगति पर नजर रखेंगे। इसके अलावा, ₹800 करोड़ ($1 बिलियन) की सरकारी ग्रांट के बावजूद, बचे हुए ₹1600 करोड़ ($2 बिलियन) के लिए बड़े कैपिटल एलोकेशन की ज़रूरत होगी। बाज़ार पर नज़र रखने वाले इस खर्च का कंपनी के कैश फ्लो और कुल डेट लेवल पर पड़ने वाले असर पर भी नज़र रखेंगे। 2028 के वित्तीय लक्ष्यों की सटीकता भी एक अहम बिंदु रहेगी।
