तिरुवनंतपुरम के Technopark ने फाइनेंशियल ईयर 2026 में **17%** की शानदार ग्रोथ के साथ **₹17,092 करोड़** का सॉफ्टवेयर एक्सपोर्ट दर्ज किया है, जो टियर-2 शहरों में IT कंपनियों के बढ़ते रुझान को दर्शाता है।
तिरुवनंतपुरम स्थित Technopark ने फाइनेंशियल ईयर 2026 के लिए अपने आंकड़ों में भारी बढ़ोतरी दर्ज की है। पिछले साल के ₹14,575 करोड़ के मुकाबले, इस बार एक्सपोर्ट रेवेन्यू बढ़कर ₹17,092 करोड़ पहुंच गया है। यह ₹2,517 करोड़ की वृद्धि यह साबित करती है कि बड़ी IT कंपनियां अब बेंगलुरु और हैदराबाद जैसे महंगे मेट्रो शहरों से हटकर केरल जैसे टियर-2 हब की तरफ तेजी से रुख कर रही हैं, ताकि वे अपना ऑपरेशनल कॉस्ट बेहतर ढंग से मैनेज कर सकें।
बड़े प्लेयर्स की मौजूदगी और रोजगार
फिलहाल इस IT कॉरिडोर में 540 से ज्यादा कंपनियां काम कर रही हैं, जिनमें TCS, Infosys, UST और Allianz जैसे दिग्गज शामिल हैं। यहां लगभग 84,000 लोगों को सीधा रोजगार मिल रहा है। कंपनियों के लिए यह इलाका न केवल टैलेंट का बड़ा सोर्स है, बल्कि मेट्रो शहरों के मुकाबले इंफ्रास्ट्रक्चर की लागत भी काफी कम है।
भविष्य की तैयारी और विस्तार
मैनेजमेंट अब अपनी कैपेसिटी बढ़ाने के लिए फेज-III और फेज-IV के विकास पर ध्यान दे रहा है। वर्तमान में यह कैंपस 768.63 एकड़ में फैला है, जिसमें 13 मिलियन स्क्वायर फीट से ज्यादा जगह मौजूद है। इन्वेस्टर्स के लिए यह विस्तार एक बड़ा संकेत है, क्योंकि अगर यह समय पर पूरा होता है, तो कंपनियों के मार्जिन में स्टेबिलिटी आने की पूरी संभावना है।
क्या जोखिम हो सकते हैं?
हालांकि विकास की रफ्तार अच्छी है, लेकिन निवेशकों को ध्यान रखना चाहिए कि इन हब्स की सफलता इंफ्रास्ट्रक्चर और टैलेंट रिटेंशन पर टिकी है। यदि नए फेजों के काम में देरी हुई या हाई-एंड टैलेंट को बनाए रखने में चुनौती आई, तो ग्रोथ की रफ्तार पर असर पड़ सकता है। इन कंपनियों का लॉन्ग-टर्म परफॉर्मेंस ट्रैक करना आगे की रणनीति तय करने के लिए बहुत जरूरी होगा।
