Tesla ने अब अपने Full Self-Driving (Supervised) सॉफ्टवेयर को Turo रेंटल प्लेटफॉर्म के साथ जोड़ लिया है। कंपनी का मकसद ट्रायल के जरिए ग्राहकों तक अपनी तकनीक की पहुंच बढ़ाना और हार्डवेयर के बजाय सॉफ्टवेयर से होने वाली कमाई पर फोकस करना है।
Tesla ने रेंटल मार्केटप्लेस Turo के साथ मिलकर अपनी तकनीक को आम लोगों तक ले जाने का बड़ा दांव खेला है। अब रेंटल होस्ट्स अपने ग्राहकों को Tesla का Full Self-Driving (Supervised) सॉफ्टवेयर इस्तेमाल करने का मौका देंगे। पात्र होस्ट्स को 1 महीने का फ्री ट्रायल मिलेगा, जिससे उनकी गाड़ियां अब ड्राइविंग टेक्नोलॉजी के प्रदर्शन का जरिया बन गई हैं।
हार्डवेयर से सॉफ्टवेयर की ओर बदलाव
कंपनी के फाइनेंशियल मॉडल में यह एक बड़ा बदलाव है। पहले Tesla का पूरा जोर कार बेचने (Hardware) पर था, लेकिन अब कंपनी रिकरिंग रेवेन्यू (Recurring Revenue) यानी सब्सक्रिप्शन मॉडल पर फोकस कर रही है। सॉफ्टवेयर का मार्जिन गाड़ी बनाने की तुलना में काफी ज्यादा होता है। तीसरी तिमाही में उत्तरी अमेरिका में हुई कुल डिलीवरी में से 75% ग्राहकों ने FSD सब्सक्रिप्शन चुना था, जो इस नई स्ट्रैटेजी की सफलता को दिखाता है।
रिस्क और चुनौतियां
हालांकि यह रणनीति शानदार है, लेकिन इसके साथ कई कानूनी और सुरक्षा संबंधी जोखिम भी जुड़े हैं। 'Supervised' तकनीक का मतलब है कि ड्राइवर को हर वक्त सतर्क रहना होगा। रेंटल के दौरान अस्थायी यूजर को इस तकनीक की सीमाओं को समझाना एक बड़ी चुनौती है। यदि कोई भी बड़ी घटना होती है, तो NHTSA जैसे रेगुलेटर कंपनी पर नकेल कस सकते हैं। निवेशकों को अब इस पर नजर रखनी होगी कि क्या रेंटल यूजर आगे चलकर लॉन्ग-टर्म सब्सक्राइबर में बदल पाते हैं या नहीं और कंपनी इस दौरान अपनी कानूनी देनदारियों को कैसे मैनेज करती है।
