Telegram CEO ने भारत सरकार के बैन को बताया बेअसर, जानिए वजह

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AuthorNeha Patil|Published at:
Telegram CEO ने भारत सरकार के बैन को बताया बेअसर, जानिए वजह

टेलीग्राम के CEO पावेल ड्यूरोव ने भारत सरकार द्वारा मैसेजिंग ऐप पर लगाए गए अस्थायी प्रतिबंध को अप्रभावी बताया है। सरकार ने परीक्षा पत्रों के लीक को रोकने के लिए यह कदम उठाया था, उनका कहना है कि इस प्लेटफॉर्म का गलत इस्तेमाल हुआ।

बैन पर Telegram CEO का तीखा बयान

टेलीग्राम के CEO पावेल ड्यूरोव ने भारत सरकार के हालिया फैसले की कड़ी आलोचना की है। सरकार ने NEET UG 2024 की परीक्षा से ठीक पहले मैसेजिंग प्लेटफॉर्म तक पहुंच को अस्थायी रूप से प्रतिबंधित कर दिया था। आरोप है कि कुछ संगठित गिरोह इस ऐप का इस्तेमाल परीक्षा सामग्री बांटने और मैसेज एडिटिंग फीचर के जरिए सबूतों से छेड़छाड़ करने में कर रहे थे।

सरकारी एक्शन और IT एक्ट का इस्तेमाल

परीक्षा की पारदर्शिता बनाए रखने के लिए, अधिकारियों ने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 69A का इस्तेमाल किया। इसके तहत इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर्स को निर्देश दिया गया कि वे 30 जून तक भारतीय यूजर्स के लिए टेलीग्राम तक पहुंच सीमित करें और खासकर इसके मैसेज-एडिटिंग फंक्शन को डिसेबल (disable) करें। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) और IIT मद्रास के अधिकारियों ने बताया कि प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल एडिट किए गए मैसेज को सर्कुलेट करने के लिए किया जा रहा था, जिसमें टाइमस्टैम्प (timestamp) बदलकर ऐसा दिखाया जा रहा था कि पेपर पहले ही लीक हो चुके थे।

कंटेंट पर टेलीग्राम का जवाब

ड्यूरोव ने सोशल प्लेटफॉर्म X पर कहा कि सरकार का यह तरीका बेअसर है। उनका मानना है कि यह कदम लगभग 15 करोड़ भारतीय यूजर्स को सजा देगा, जबकि परीक्षा धोखाधड़ी की मूल समस्या हल नहीं होगी। उन्होंने यह भी कहा कि प्रतिबंधित सामग्री को रोका नहीं जा सका, बल्कि वह दूसरे मैसेजिंग ऐप्स पर शिफ्ट हो गई। ड्यूरोव ने यह भी साफ किया कि टेलीग्राम ने लीक सामग्री साझा करने वाले सैकड़ों चैनलों को पहले ही हटा दिया है और कंपनी अब एडिट किए गए मैसेज के लिए और स्पष्ट इंडिकेटर (indicator) पर काम कर रही है ताकि पुराने टाइम-स्टैम्प वाले घोटालों को रोका जा सके।

डिजिटल गवर्नेंस पर बड़ी बहस

इस घटना ने डिजिटल पॉलिसी को लेकर एक बड़ी बहस छेड़ दी है। इंटरनेट फ्रीडम फाउंडेशन (Internet Freedom Foundation) जैसे समूहों ने ऐसे व्यापक सर्विस ब्लॉक (service block) की प्रभावशीलता पर सवाल उठाए हैं। आलोचकों का कहना है कि इस तरह के प्रतिबंध संगठित परीक्षा कदाचार जैसी जटिल समस्याओं का सिर्फ एक अल्पकालिक समाधान हैं, जिसमें एक सिंगल मैसेजिंग ऐप के नियंत्रण से परे कई मुद्दे शामिल हैं। यह देखना अहम होगा कि टेलीग्राम अपने सबसे बड़े ग्लोबल मार्केट में से एक में इन रेगुलेटरी मुश्किलों से कैसे निपटता है और अपनी मॉडरेशन पॉलिसी (moderation policy) को स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार कैसे ढालता है।

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