सैन फ्रांसिस्को में शुरू हुए TechCrunch Disrupt 2026 में बड़ा बदलाव दिखा है। अब सारा फोकस फिजिकल AI, एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर और स्टार्टअप्स की प्रॉफिटेबिलिटी पर शिफ्ट हो गया है। इन्वेस्टर्स के लिए साफ संकेत है कि अब केवल हाइप से काम नहीं चलेगा, असली यूटिलिटी दिखाने वाली कंपनियां ही जीतेंगी।
सैन फ्रांसिस्को के Moscone West कन्वेंशन सेंटर में चल रहे इस इवेंट में 10,000 से ज्यादा फाउंडर्स और इन्वेस्टर्स जुटे हैं। इस बार का फोकस पारंपरिक AI सॉफ्टवेयर से हटकर रोबोटिक्स, स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर और डेटा सेंटर्स की भारी-भरकम बिजली जरूरतों पर आ गया है।
'Energy Wall' की बड़ी चुनौती
इवेंट में चर्चा का मुख्य केंद्र 'Energy Wall' है। बड़े टेक दिग्गज अब केवल एल्गोरिदम बनाने पर नहीं, बल्कि AI सिस्टम को पावर देने, कूलिंग सिस्टम मैनेज करने और हार्डवेयर फ्रेमवर्क को मजबूत करने पर जोर दे रहे हैं। इन्वेस्टर्स अब कागजी मुनाफे के बजाय धरातल पर दिखने वाली यूटिलिटी मांग रहे हैं।
इन्वेस्टर्स के लिए जोखिम और संकेत
एक्सपर्ट्स ने 'सर्कुलर फाइनेंसिंग' (जहाँ कंपनियां एक-दूसरे में निवेश कर रही हैं) को लेकर चेतावनी दी है। बड़े टेक फर्मों का भारी-भरकम 'केपेक्स' (Capex) अब चिंता का विषय है, क्योंकि मार्केट अब यह देखना चाहता है कि यह खर्च कब तक असली रेवेन्यू में बदल पाएगा।
भारतीय मार्केट पर क्या होगा असर?
यह ग्लोबल ट्रेंड भारत के IT सर्विसेज और इंफ्रा सेक्टर के लिए अहम है। जैसे-जैसे ग्लोबल कंपनियां फिजिकल AI और सप्लाई चेन ऑटोमेशन की तरफ बढ़ रही हैं, भारतीय IT कंपनियों को बड़े प्रोजेक्ट्स मिल सकते हैं। साथ ही, डेटा सेंटर की बढ़ती मांग का सीधा फायदा भारतीय पावर और कूलिंग इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियों को मिल सकता है। हालांकि, निवेशकों को प्रोजेक्ट एग्जीक्यूशन और कर्ज की बढ़ती लागत जैसे रिस्क पर नजर रखनी होगी।
